यूनिफार्म का कपड़ा बाजार में नहीं
झांसी। जिले में सभी प्राइमरी एवं उच्च प्राइमरी स्कूलों में जुलाई तक सभी छात्र - छात्राओं को गणवेश (यूनिफार्म) बंटनी हैं लेकिन मानक का कपड़ा बाजार में नहीं है। 67 प्रतिशत पॉलिस्टर और 33 प्रतिशत कॉटन के कपड़े का मानक तय है। ऐसे में शिक्षक एवं शिक्षाधिकारी पसोपेश में हैं। यूनिफार्म की खरीद के बाद जांच में फंसने के भय की वजह से भी शिक्षक नहीं खरीद रहे हैं।
प्राइमरी एवं उच्च प्राइमरी स्कूलों में अध्ययनरत एक लाख 50 से अधिक छात्र - छात्राओं को नए शैक्षिक सत्र में दो - दो जोड़ी नई यूनिफार्म दी जानी है। शासन ने प्रत्येक जोड़ी यूनिफार्म के लिए 300 - 300 रुपये आवंटित किए हैं। हालांकि अभी यह धनराशि एक किस्त में आई है। वहीं शिक्षकों के समक्ष इस बार यूनिफार्म खरीद को लेकर बड़ी दुविधा बनी हुई है। खरीद में कई कडे़ मानक बनाए गए हैं। इसमें प्रमुख रूप से यूनिफार्म के कपडे़ को लेकर है, जो महानगर ही नहीं, बल्कि आस पास के बाजारों में भी उपलब्ध नहीं है। स्वयं सहायता समूह भी इस कपडे़ को उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। शिक्षकों के अनुसार 67 प्रतिशत पॉलिस्टर और 33 प्रतिशत कॉटन मिश्रित कपड़ा कहीं पर भी नहीं मिल रहा है। जबकि 15 जुलाई तक सभी विद्यार्थियों को यूनिफार्म देनी है। कई जगह संपर्क किया, लेकिन इस प्रकार की क्वालिटी का कपड़ा नहीं मिल रहा है। इस संबंध में बीएसए हरिवंश कुमार ने बताया कि मार्केट में कपड़ा उपलब्ध है। सभी विद्यालयों में मानक के अनुसार यूनिफार्म विद्यार्थियों को दी जाएगी। यूनिफार्म के कपडे़ की सैंपल की जांच निदेशालय की प्रयोगशाला में होगी।
नौ लाख पुस्तकें हुईं वितरित
जिला बेसिक विभाग के दावे पर यकीन करें तो जनपद के सभी राजकीय, अनुदानित व सरकारी प्राइमरी व उच्च प्राइमरी स्कूलों में पुस्तकें आधी से अधिक बंट चुकी हैं। एक लाख 54 हजार 160 छात्र-छात्राओं को पुस्तकें दी जा चुकी हैं। 10 लाख 23 हजार पुस्तकों में से अब तक 9 लाख पुस्तकें वितरित हो चुकी हैं। इनमें वर्क बुक भी शामिल है।