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यूनिफार्म के नाम पर भी शुरू हो गया कमीशन का खेल

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : demo
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फीस और किताबों के बाद यूनिफार्म के नाम पर भी अभिभावकों को लूटने की  तैयारी शुरू हो गई है। कई स्कूल यूनिफार्म के साथ मास्क भी मुहैया कराने के  लिए जुटे हैं। आलम यह है कि हर साल अभिभावकों को तय दुकानों से यूनिफार्म  खरीदने के लिए कहा जाता है। दरअसल, जिले में स्कूल यूनिफार्म के नाम पर भी अभिभावकों को जमकर लूटते  हैं। कई स्कूल प्रबंधन ड्रेस विक्रेता से कमीशन तय कर यूनिफार्म की बिक्री  कराते हैं। अभिभावकों को कभी टाई के नाम पर ठगा जाता है, तो कभी बेल्ट के  नाम पर। इसके साथ ही कई स्कूल कोटी की खरीद करने का दवाब बनाते हैं।  लॉकडाउन के चलते अभी सारे स्कूल बंद हैं। लेकिन स्कूलों के किताबों के साथ  अभिभावकों को यूनिफार्म के नाम भी ठगने की तैयारी शुरू कर दी है। अभिभावक  बताते हैं कि हर साल यूनिफार्म के नाम पर करीब दो हजार रुपये तक खर्च होते  हैं। यूनिफार्म के जरिए ठगी के खेल को बंद किया जाए। स्कूल यूनिफार्म के साथ अभिभावकों से ट्रैक सूट और ब्लैजर के नाम पर भी  वसूली करते हैं। बाजार में अन्य दुकान ट्रैक सूट 600 रुपये तक मिल जाता है,  जबकि स्कूलों की तय दुकानों पर यह एक हजार रुपये तक बिकता है। इसके साथ ही  ब्लेजर के नाम भी अभिभावकों की जेब काटी जाती है। स्कूल एक  दुकानदार को तय कर पूरा ऑर्डर दे देते हैं। जिसके बाद विक्रेता  कपड़ा खरीदकर टेलर को दे देते हैं। थोक में शर्ट कपड़ा 150 रुपये मीटर और  पैंट का कपड़ा 200 रुपये मीटर तक पड़ता है। इसके बाद टेलर को करीब 100  रुपये प्रति ड्रेस के हिसाब से थोक में आर्डर दिया जाता है। कुल मिलाकर  देखा जाए तो पूरी ड्रेस 500 रुपये की पड़ती है। जिसे दुकानदार और स्कूल  मिलकर दो हजार रुपये तक बेचते हैं।
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