फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रेलवे का ये कैसा काम, तीन साल में भी नहीं बन सका बल्लमपुर क्रॉसिंग पर अंडरब्रिज

विज्ञापन
बल्लमपुर अंडरपास में जमा पानी और कीचड़। - फोटो : REPORTERS
विज्ञापन
झांसी। रेलवे बिजौली के पास बल्लमपुर क्रॉसिंग पर तीन साल से अंडरब्रिज बना रहा है और अभी काम आधा ही हो सका है। इस ब्रिज के न बनने से 45 से अधिक गांव के लोग आवागमन के लिए परेशान हो रहे हैं। विकल्प के रूप में आधा किलोमीटर दूर बने अंडर पास (छोटी पुलिया) में पानी भरने और कीचड़ होने से लोगों का निकलना बेहद मुश्किल भरा बना हुआ है।
विज्ञापन

रेलवे मंडल की सभी प्रमुख क्रॉसिंग गेट को एक- एक कर बंद करता जा रहा है। ट्रैफिक वाले अधिकांश क्रासिंग गेट पर या तो ओवरब्रिज बना दिए गए हैं या अंडर ब्रिज। कई जगह अभी काम चल रहा है। बिजौली के निकट भी क्रासिंग गेट नंबर 364 को बंद करके अंडरब्रिज बनाया जा रहा है। पिछले तीन साल से यहां काम चल रहा है, लेकिन पटरी के एक तरफ का काम ही काम पूरा हो सका है। अभी बल्लमपुर की तरफ काम चल रहा है। रास्ता बनाने के लिए जेसीबी से खुदाई की जा रही है। बड़ी मशीन न लगाने के कारण यह काम भी धीमा चल रहा है।
वहीं, क्रॉसिंग के बंद होने से बल्लमपुर और इससे आगे जाने वाली सड़क पर बने 45 से अधिक गांव के लोग झांसी और आसपास क्षेत्रों में जाने के लिए परेशान हो रहे हैं।
विज्ञापन

बल्लमपुर क्रॉसिंग पर लगातार काम चल रहा है। जल्द ही बाकी काम पूरा होने वाला है। काम पूरा होते ही लोगों के लिए अंडरब्रिज का रास्ता खोल दिया जाएगा। मनोज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी।
इन गांवों के लोग परेशान
अंडरब्रिज का काम पूरा न होने के कारण बल्लमपुर, दुर्गापुर, मथुरापुरा, सफा, किल्चवारा, चमरुआ, कोटी, बंडा, मोराई, बेदौरा, रमपुरा आदि गांव के लोग परेशान हो रहे हैं।
बरसात शुरू होते ही गांव वालों की परेशानी ज्यादा बढ़ जाती है। अंडर पास से निकलने में हर वक्त गिरने का डर बना रहता है। डॉ. कौशल राय।
अंडरब्रिज का काम शुरू से ही धीमा पड़ रहा है। कभी तेजी से काम करने की कोशिश दिखाई नहीं दी। खामियाजा गांव के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। गोविंद सिंह यादव।
विज्ञापन

जिस अंडरपास से लोग अभी निकल रहे हैं, उसमें से पानी निकालने की कोई व्यवस्था रेलवे द्वारा नहीं की गई। विजय राय।
पटरियों की दूसरी तरफ मंदिर बना हुआ है। मजबूरन महिलाओं को पटरी पार करके मंदिर जाना पड़ता है। उमेश झा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें