संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। बच्चों से लेकर युवाओं में तेजी से बढ़ रहे मधुमेह ने टीबी का खतरा बढ़ा दिया है। मेडिकल कॉलेज, जिला टीबी अस्पताल और जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों में पाया जा रहा है कि बेकाबू डायबिटीज के मरीजों में टीबी का संक्रमण जोर दिखा रहा है। ऐसे में उनके इलाज में लगने वाला समय भी बढ़ रहा है।
मधुमेह की बीमारी आमतौर पर शरीर को तो कमजोर करती ही है, इससे टीबी का खतरा भी बढ़ रहा है। शरीर में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ने और अच्छा खानपान न होने के चलते टीबी के जीवाणु इंसानी शरीर को अपना घर बना रहे हैं। चिकित्सक बताते हैं कि वायरल, फंगस और जीवाणुओं से फैलने वाली बीमारियों में टीबी भी शामिल है। ऐसे में जब मरीज के शरीर में ग्लूकोज की मात्रा ज्यादा होती है तो टीबी के जीवाणुओं को ताकतवर होने का मौका मिल जाता है।
बैक्टीरिया
टीबी के जीवाणुओं से ऐसे करें बचाव
मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सक और चेस्ट विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. मर्धुमय शास्त्री बताते हैं कि मधुमेह का वैसे तो टीबी से सीधा संबंध नहीं है। लेकिन,अनियंत्रित मधुमेह रोगियों के लिए टीबी का खतरा अधिक बढ़ जाता है। ऐसे मरीजों को चाहिए कि वह खुले कमरे में रहें, जहां सूरज की रोशनी आती हो। साथ ही मास्क लगाकर रहें। बंद कमरे या भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में टीबी का जीवाणु फैलने का खतरा अधिक रहता है।
जिला क्षयरोग अधिकारी डॉ. यूएन सिंह ने बताया कि वर्तमान में जिले की जनसंख्या के अनुपात में टीबी के मरीजों की संख्या लक्ष्य से अधिक है। अब तक हमने 8,600 मरीजों को चिह्नित किया है, जिन्हें विभिन्न सेंटर से स्वास्थ्य लाभ दिया जा रहा है। इनमें शुगर के मरीज भी शामिल हैं। ऐसे में इनके इलाज में सामान्य टीबी के मरीजों की तुलना में इलाज का समय अधिक लग रहा है।