उमेश पाल हत्याकांड में करीब डेढ़ महीने से ज्यादा समय के बाद पांच लाख का इनामी और माफिया अतीक अहमद का बेटा असद आखिरकार पुलिस के चक्रव्यूह में फंस ही गया। पुलिस ने इस पूरे ऑपरेशन को बड़ी ही सटीकता से अंजाम दिया। जी हां, अगर पूरे घटनाक्रम पर गौर करें तो पुलिस ने इस पूरे प्लान को बड़ी सूझ-बूझ के साथ अंजाम दिया। अतीक अहमद को साबरमती जेल से झांसी के रास्ते प्रयागराज लाना ये दर्शाता है कि इसके पीछे असद को बाहर लाने का प्लान था। पुलिस के मुताबिक, अतीक और अशरफ को छुड़ाने के लिए असद पुलिस काफिले पर हमले की फिराक में था। मुमकिन है कि पुलिस पूरी योजना के तहत सड़क के रास्ते अतीक को दो बार प्रयागराज लेकर आई, ताकि असद और उसके गुर्गे बाहर निकलें, और हुआ भी वही। आइए विस्तार से जानते हैं वो बातें जो इन संभावनाओं को और मजबूती देती हैं।
Asad Ahmad encounter
- फोटो : Agency
अतीक-अशरफ को छुड़ाने के लिए काफिले पर हमला करना चाहता था असद
यूपी में माफिया अतीक अहमद के बेटे असद अहमद और शूटर गुलाम के एनकाउंटर के बाद यूपी पुलिस के एडीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस की और पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 24 फरवरी को प्रमुख गवाह उमेश पाल की हत्या के मामले में आरोपियों की पहचान कर उनके पीछे पुलिस टीम लगाई गई थीं। आज हत्यारोपियों को ढेर कर दिया गया है। उन्होंने कहा है कि अतीक और अशरफ को छुड़ाने के लिए पुलिस काफिले पर असद हमला करना चाहता था।
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असद अहमद
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15 दिनों के भीतर दो बार अतीक को गुजरात से लाया गया प्रयागराज
उमेश पाल हत्याकांड में नामजद माफिया अतीक अहमद को गुजरात की साबरमती जेल से प्रयागराज दो बार लाया गया। वह भी करीब 15 दिनों के अंतराल में। पहली बार 28 मार्च को इलाहाबाद कोर्ट में पेश करने के लिए अतीक को लाया गया और दूसरी बार 12 अप्रैल यानी कल ही अतीक प्रयागराज पहुंचा था। कहीं असद को बाहर लाने के लिए ही दोनों बार अतीक को सड़क के रास्ते प्रयागराज नहीं लाया गया?
असद अहमद एनकाउंटर में ढेर
- फोटो : AMAR UJALA
अतीक को साबरमती जेल से लाते समय दिखी थीं संदिग्ध गाड़ियां
सूत्रों के अनुसार, अतीक अहमद को जब पिछली बार गुजरात की साबरमती जेल से प्रयागराज ले जाया जा रहा था तो अतीक के एनकाउंटर के डर से उसके घर की महिलाओं के अलावा कुछ संदिग्ध गाड़ियां भी देखी गईं थी। हो सकता है यहां से कहानी ने नया मोड़ लिया हो और पुलिस ने प्लान तैयार किया। क्या पुलिस ने इसी के चलते अतीक को दोबारा प्रयागराज लाने के लिए सड़क का रास्ता ही चुना?, जिसमें इस बार अतीक का बेटा असद और शूटर गुलाम फंस गया।
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अतीक अहमद की फैमिली ट्री
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तो क्या पुलिस ने ट्रैक किया रूट, असद की पल-पल की थी खबर
ऐसा मुमकिन है कि जब पिछली बार अतीक को प्रयागराज ले जाते समय काफिले में कुछ संदिग्ध गाड़ियां दिखीं थी तो पुलिस को उम्मीद थी कि इस बार भी ऐसा ही कुछ होगा। इस बार पहले से तैयार पुलिस के रडार पर असद आ गया। इसके बाद पुलिस ने असद को ट्रैक किया और सही समय देखकर उसे पकड़ने का प्रयास लेकिन वह एनकाउंटर में मारा गया।
असद अहमद
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Asad Ahmed Encounter
- फोटो : अमर उजाला
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भी अतीक की हो सकती थी पेशी
15 दिनों के भीतर दो बार अतीक जैसे अपराधी को सड़क के रास्ते लाना वो भी तब जब गुजरात की साबरमती जेल से प्रयागराज तक सफर करीब 24 घंटे से भी अधिक का हो। इसके बाद भी पुलिस ने इस जोखिम को उठाया और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अतीक की कोर्ट में पेशी नहीं कराई। सवाल है क्या सड़क के रास्ते अतीक को लाकर उसके गुर्गों को बाहर निकलने के लिए मजबूर कर दिया?
अतीक अहमद
- फोटो : अमर उजाला
जान लीजिए 24 फरवरी के दिन क्या हुआ था?
2005 में हुई विधायक राजू पाल की हत्या के मामले में उमेश पाल मुख्य गवाह थे। 24 फरवरी शुक्रवार को करीब साढ़े चार बजे उमेश कार से वापस सुलेमसराय, धूमनगंज स्थित अपने घर के लिए चल दिए। जैसे ही गेट पर गाड़ी रोककर उमेश उतरे, पहले से घात लगाए बदमाशों ने उन्हें गोली मार दी। उमेश गोली लगने से गिरने के बाद उठकर घर के भीतर भागे। साथ में उनकी सुरक्षा में लगे दोनों सिपाही भी उन्हें बचाने के लिए घर के अंदर भागे। लेकिन, हमलावरों ने दुस्साहस का परिचय देते हुए घर के अंदर घुसकर स्वचालित हथियारों से लगातार गोलियां बरसाईं।
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अतीक अहमद और उसका परिवार
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इस दौरान बदमाशों ने बम भी चलाए। बम और गोलियों की बौछार से इलाका थर्रा गया। हमलावर वहां से फरार हो गए। उमेश पाल, सिपाही संदीप और राघवेंद्र लहूलुहान पड़े थे। तीनों को एसआरएन हॉस्पिटल ले जाया गया। जहां डाक्टरों ने करीब एक घंटे बाद उमेश पाल को मृत घोषित कर दिया। आजमगढ़ निवासी सुरक्षागार्ड संदीप निषाद की भी अस्पताल में मृत्यु हो गई। शुक्रवार रात में ही पुलिस ने माफिया अतीक के दो नाबालिग बेटों को घर से हिरासत में लिया।