झांसी। पिछले पचास सालों से बुंदेलखंड की विरासत और संस्कृति को सहेजने वाले मुकुंद मेहरोत्रा की 74 वर्ष की आयु में भी ऊर्जावार्न हैं। वह आज भी अपने काम को ठीक उसी तरह से अंजाम दे रहे हैं, जैसे वह शुरुआती दिनों में दिया करते थे। उनके इस कर्मयोग ने आज भी पीढ़ी को कई प्राचीन परंपराओं से रूबरू कराया है। साथ ही कला संस्कृति को भी पुनर्जीवन दिया है।
स्टार फोर्ट की जब-जब बात चलती है, लोगों की जुबां पर स्वत: ही मुकुंद मेहरोत्रा का नाम आ जाता है। देश की स्वतंत्रता के गदर का साक्षी सितारे के आकार वाला यह अनूठा किला एक सदी से अधिक समय तक गुमनामी के अंधेरों में खोया रहा।
लेकिन, यह मुकुंद जी के ही 1995 से लेकर 2010 तक पंद्रह सालों तक लगातार किए गए प्रयास ही थे, जिससे यह किला सेना ने आम आदमी के लिए खोला गया। ऐसे में यहां बुंदेलखंड की चितेरी कला का जिक्र करना भी जरूरी होता है। शादी ब्याह के मौके पर घर बाहरी दीवारों पर बनाई जाने वाली यह चित्रकारी अस्सी-नब्बे के दशक में इतिहास में बदलने लगी थी। इसे पुनर्जीवन मुकुंद जी के प्रयासों से ही मिला। बात सन 1995 की है। मुकुंद जी के सिनेमाघर नंदिनी में हम आपके हैं कौन फिल्म लगी हुई थी, जिसे देखने दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ रही थी।
इसी का फायदा उठाते हुए उन्होंने सिनेमा घर की बाहरी व अंदरूनी दीवारों पर चितेरी कला शैली के तमाम चित्र बनवा दिए। आलम यह रहा कि इन चित्रों को देखने राजश्री प्रोडक्शन की पूरी टीम झांसी आई। इसके बाद चितेरी कला को झांसी महोत्सव के मुख्य मंच पर भी मुुकुंद जी लेकर गए। इन्हीं सारे प्रयासों का नतीजा है कि अब एक बार फिर शादी ब्याह वाले घरों की बाहरी दीवारों पर अनिवार्य रूप से चितेरी कला देखने को नजर आ जाती है। साथ इस कला से जुड़े दर्जनों कलाकारों का रोजगार भी खूब चल रहा है। अब भी कला संस्कृति से जुड़ा कोई भी आयोजन हो, मुकुंद मेहरोत्रा उसके सहभागी बनने में एक मिनट भी नहीं सोचते। मंच पर वह भले ही नजर न आएं, परंतु पर्दे के पीछे से वह अपना काम करते रहते हैं। इतना ही नहीं, उम्र के इस पड़ाव पर पहुंचने के बाद भी वह अपने व्यवसाय पर पूरा ध्यान देते हैं।
विभिन्न सामाजिक संस्थाओं की हैं धुरी
पेट्रोल पंप, सिनेमा घर और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के मालिक मुकुंद मेहरोत्रा कला - संस्कृति से जुड़ी गतिविधियों में लगातार सक्रिय रहते हैं। बुंदेलखंड की लोक कला संस्कृति के विकास के लिए ‘पुलिंद कला दीर्घा’ संस्था का संचालन कर रहे हैं। इसके अलावा बुंदेली कलाकारों की संस्था लोक कला संगम संस्थान में भी सक्रिय हैं। झांसी महोत्सव आयोजन समिति, रामलीला कमेटी, जिला पर्यटन समिति आदि समेत तमाम संस्थाओं में वह अपने योगदान करते चले आ रहे हैं।