भारत सरकार के केंद्रीय जल आयोग द्वारा सिद्ध की बगिया की श्रमदान के जरिये औपचारिक सफाई की रूपरेखा बनाई गई है, लेकिन इससे सटे हुए लक्ष्मी ताल की सुध नहीं ली जा रही है। यह गंदगी से बजबजा रहा है। जबकि, केंद्रीय मंत्री उमा भारती का ताल से सटी हुई कालोनी ओम शांति नगर में निवास है। बावजूद, पानी के इस प्राचीन स्त्रोत का बुरा हाल है।
स्थानीय सांसद उमा भारती भारत सरकार की केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री हैं। उनके मंत्रालय पर देश की नदियों व पानी के अन्य स्रोतों के संरक्षण की बड़ी जिम्मेदारी है। बावजूद, उमा के घर से सटा हुआ पानी का प्राचीन स्रोत लक्ष्मी ताल बदहाल है। उमा को मंत्रालय का प्रभार मिले तीन साल पूरे होने को हैं, लेकिन ताल की हालत में सुधार के लिए अब तक एक कदम भी नहीं उठाया गया है। स्थिति यह है कि पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण 72 एकड़ के विस्तृत क्षेत्रफल में फैला यह तालाब गंदगी से बजबजा रहा है। इसके पानी में सड़ांध आ रही है। इसके अलावा यह जलकुंभी से अटा पड़ा है। पानी नजर नहीं आता है। तालाब के किनारों पर छुटा जानवर कुत्ते, सुअर, गायों के झुंड जमा रहते हैं और घाटों पर गंदगी फैली रहती है। इससे यहां आने वालों को मायूसी होती है।
भारत सरकार का केंद्रीय जल आयोग ताल के पास बने सिद्ध की बगिया के चौपड़े की श्रमदान के जरिये सफाई कर रहा है, लेकिन आयोग के अधिकारियों का ध्यान चौपड़े से सटे लक्ष्मी ताल पर नहीं है।
ताल की आठ एकड़ जमीन गायब
भू राजस्व अभिलेखों में लक्ष्मी ताल का रकवा 80 एकड़ दर्ज है, लेकिन मौके पर 72 एकड़ जमीन ही उपलब्ध है। ताल की गायब हुई जमीन का पता लगाने के लिए एक साल पहले यहां कई बार पैमाइश की गई थी, लेकिन जमीन का पता नहीं चल सका था। इससे साफ जाहिर होता है कि ताल की कीमती जमीन अतिक्रमण की चपेट में है। लेकिन, प्रशासन की ओर से ताल की भूमि का पता लगाने के प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
बन सकता है पर्यटन का बड़ा केंद्र
लक्ष्मी ताल पर्यटन का बड़ा केंद्र बन सकता है। इसके इर्द-गिर्द प्राचीन काली मंदिर, लक्ष्मी मंदिर के अलावा अन्य कई मंदिर स्थिति हैं। इसके अलावा राजकीय उद्यान नारायण बाग भी है। इन स्थानों पर लोगों का आना जाना बना रहता है, परंतु तालाब की स्थिति देखकर लोगों को मायूसी होती है। तालाब को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किए जाने से यह पर्यटन का बड़ा केंद्र बन सकता है। इसके लिए प्रभावी कार्ययोजना व प्रबल इच्छाशक्ति की आवश्यकता है।
सरकार के पास प्रस्ताव भेजेंगे
लक्ष्मी ताल का प्रोजेक्ट बड़ा है। इसकी सफाई करना इतना आसान नहीं है। ताल को केंद्र सरकार की ट्रिपल आर स्कीम (रिपेयर रिनोवेशन एंड रिस्टोरेशन ऑफ वाटर बॉडी) में शामिल कराने का प्रयास किया जाएगा। इसका प्रस्ताव प्रदेश सरकार को भेजना होगा। इसमें केंद्र सरकार की भी आर्थिक मदद मिलेगी।
- अशोक गोयल, मुख्य अभियंता- केंद्रीय जल आयोग
श्रमदान से शुरू हुई चौपड़े की सफाई
भारत सरकार के जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय की ओर से देश में 31 मार्च तक स्वच्छता पखवाड़ा मनाया जा रहा है। इसके तहत सोमवार को बेतवा नदी परिषद द्वारा सिद्ध की बगिया के चौपड़े की सफाई शुरू की गई। चौपड़े की सफाई के लिए अधिकारियों ने श्रमदान किया, ताकि और लोग भी इसके लिए प्रेरित हों। पहले दिन नोडल अधिकारी डॉ. मोहम्मद आरिज, उप नोडल अधिकारी एसके शर्मा और मोइनुदद्दीन, जिलाधिकारी अजय कुमार शुक्ला, महापौर किरण वर्मा समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल रहे।