विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नए इक्विटी कानून के मुद्दे पर भाजपा के पूर्व शिक्षा मंत्री रवींद्र शुक्ल ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर चेतावनी दी कि यदि यूजीसी का घातक जाति संघर्ष को बढ़ाने वाला कानून वापस नहीं किया गया तो वह भाजपा से त्यागपत्र दे देंगे।
वंदेमातरम लागू करने पर 27 साल पहले गंवा दी थी कुर्सी
कल्याण सिंह सरकार में रवींद्र शुक्ल बेसिक शिक्षा मंत्री थे। सत्ता में रहने के दौरान वंदेमातरम गीत को उत्तर प्रदेश के बेसिक स्कूलों में अनिवार्य किए जाने पर 27 साल पहले उन्हें अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी थी। केंद्र की साझा सरकार में शामिल दलों के दबाव में प्रदेश सरकार को यह आदेश भी वापस लेना पड़ा था। अब यूजीसी की ओर से लागू नए इक्विटी कानून पर भी पूर्व मंत्री अपनी ही सरकार के खिलाफ मुखर हो गए हैं।
जातिगत खाई गहरी होगी- पूर्व मंत्री
वहीं, अमर उजाला से बातचीत में पूर्व मंत्री बोले कि यूजीसी का नया नियम जातीय संघर्ष का प्रेरक बनेगा। इससे जातिगत खाई गहरी होगी। महाविद्यालय और विश्वविद्यालय के परिसर नकारात्मक ऊर्जा से भर जाएंगे। रोज लड़ाई और प्राथमिकी दर्ज होगी। ये सब किस सीमा तक जाएगा, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। एक तरफ कहा जा रहा है कि सारे हिंदू समाज को बचाने के लिए जातिवाद समाप्त होना चाहिए। सरकार की भी जिम्मेदारी है कि जातिगत खाई बढ़े नहीं, बल्कि घटे। इसलिए गहन समीक्षा करके सभी वर्ग को शामिल किया जाना चाहिए। सबका साथ, सबका विकास का तात्पर्य ब्राह्मण, वैश्य, ठाकुर को एकतरफ करके कोई निर्णय लेना और प्रताड़ित करना नहीं है। इसका तात्पर्य है कि सभी के साथ न्याय हो। बोले कि ये नियम वापस नहीं लिया गया तो भाजपा से त्यागपत्र दे दूंगा। इस मामले में जन आक्रोश साफ दिख रहा है। फिर वह लोगों के साथ खड़े होकर इसका विरोध करेंगे।
अमर उजाला से पूर्व मंत्री की खास बात, वीडियो...