फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उदैनिया परिवार हत्याकांड: चार सवालों का नहीं मिल सका जवाब

विज्ञापन
विज्ञापन
झांसी। पुलिस ने उदैनिया परिवार के चार लोगों की मौत की गुत्थी को सुलझाने का दावा भले ही कर दिया लेकिन अभी भी चार सवाल ऐसे हैं जिनका जवाब नहीं मिल पा रहा है। कर्ज में डूबे जगदीश के आत्महत्या करने की बात तो समझ में आती है लेकिन वह अपनी बूढ़ी मां, बेटी और पत्नी को क्यों मारेगा। जगदीश को करीब से जानने वाले लोगों का कहना है कि जगदीश ऐसा कर ही नहीं सकता। अगर जगदीश को किसी ने पेट्रोल खरीदकर लाते देखा था तो वह इतने दिन खामोश क्यों रहा।
विज्ञापन

सवाल-1
कर्ज जगदीश पर था तो परिवार को क्यों मारेगा: पुलिस का कहना है कि जगदीश सोसायटी (लाटरी डालने का काम) चलाता था। उस पर कर्ज बढ़ता जा रहा था। एक लाटरी का ही पचास लाख फंस गया था। जिनका पैसा था वह मांग रहे थे। कर्ज की बात मानी जा सकती है लेकिन कर्ज में डूूबा इंसान पूरे परिवार को क्यों खत्म करेगा। बूढ़ी मां को क्यों मारेगा।
सवाल-2
पुलिस दावा कर रही है कि जिस दिन घटना हुई थी उस दिन एक सुसाइड नोट भी मिला था। उस पर 20 अगस्त की तारीख अंकित थी। लेकिन उस वक्त पुलिस ने सुसाइड नोट की जानकारी किसी को नहीं दी थी। मीडिया से भी इस बात को छुपाया गया था। अब कह रहे हैं कि हैंडराइटिंग एक्सपर्ट को पत्र भेजा गया था।
विज्ञापन

सवाल-3
पुलिस का कहना है कि सुसाइड नोट में एक महिला का नाम लिखा था। जब उसका नाम लिखा था तो पुलिस ने उसे उसी समय हिरासत में क्यों नहीं लिया था। दो माह बाद अचानक पुलिस का हिरासत में लेना भी सवाल खड़े कर रहा है।
सवाल-4
घटना के बाद पुलिस दावा कर रही थी कि किसी आपसी ने ही सभी को मौत के घाट उतारा है। पुलिस ने शटर खुलने को लेकर संदेह जताया था। शटर की भी कई बार जांच कराई थी। पुलिस की पड़ताल भी घटनास्थल के इर्द-गिर्द घुमती रही थी।
लपटें देखकर घबरा गए थे परिजन
घटना के समय पिता जुगल किशोर उदैनिया बगल में बने मंदिर वाले कमरे और जगदीश के छोटे भाई दीपक उदैनिया पत्नी व बच्चों के साथ घर के ऊपरी हिस्से में बने कमरे में सो रहे थे। जिस वक्त वह जागे घर के नीचे के हिस्से से धुआं और आग की लपटें उठ रहीं थीं। पड़ोसियों की मदद से वह परिवार समेत सीढ़ी से उतरकर बाहर आ सके थे। आग बुझने से पहले ही उक्त चारों की जलकर मौत हो चुकी थी।
रसमलाई खिलाकर किया था बेहोश
सभी को मारने से पहले जगदीश शाम को एक दुकान से रसमलाई लेकर आए थे। जिसमें मिलावट कर दी थी। रात को खाना खाने के बाद जगदीश को छोड़कर सभी ने रसमलाई खाई थी। मां, पत्नी व पुत्री के बेहोश होने के बाद ही सभी को आग लगाकर मारा था।
दो कट्टियों में लाए थे पांच-पांच लीटर पेट्रोल
सभी को मारने की प्लानिंग जगदीश ने तैयार कर रखी थी। दो कट्टियों में पांच-पांच लीटर पेट्रोल खरीदकर लाए थे। एक ही कट्टिया से सभी को जलाकर खुद को जगदीश ने मार लिया था।
दिवाली की रात मिलनी थी सोसाइटी की रकम
बताया गया है कि एक सोसाइटी की रकम दिवाली की रात मिलनी थी। इसी दिन 50 लाख रुपये आरती राजौरिया को वापस करने थे। आरती से रकम न मिलने के कारण पूरा परिवार परेशान था। जगदीश टेंशन में रहने लगे। 13 अक्तूबर को आरती से झगड़ा होने के बाद उन्होंने परिवार को खत्म करने की ठान ली थी।
करीब एक करोड़ का था कर्ज
मृतक जगदीश लंबे समय से सोसाइटी का काम कर रहे थे। इस सोसाइटी में करीब 100 लोग थे। सोसाइटी खुलने के बाद रकम को ब्याज पर दूसरे लोगों को दे दिया जाता था। जगदीश ने दूसरों की रकम ब्याज पर ले रखी थी। जिसे दूसरे लोगों को ब्याज पर दे दिया था। बताया गया है कि करीब बीस लोगोें से रकम न मिलने के कारण वह एक करोड़ के कर्जदार हो गए थे। जिसके चलते वह परेशान थे। दूसरी तरफ, आरती से भी रकम न मिलने के कारण परेशानी बढ़ने लगी थी। पुलिस के अनुसार वह शराब भी पीने लगे थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें