अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। अपर सत्र न्यायाधीश विजय कुमार वर्मा-प्रथम की अदालत ने चेक बाउंस होने के मामले में अभियुक्त को अधीनस्थ न्यायालय द्वारा सुनाई गई दो साल के सश्रम कारावास की सजा को बरकरार रखा। अभियुक्त को 31 लाख रुपये जुर्माना भी अदा करना होगा।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता देवेंद्र पांचाल ने बताया कि पुलिया नंबर नौ मोहल्ला कछियाना निवासी मोहम्मद कादर ने अधीनस्थ न्यायालय में वाद दायर किया था, जिसमें बताया था कि वसंत विहार सिविल लाइन निवासी राजा साहब भदौरिया से उसके घनिष्ठ संबंध थे। राजा साहब भदौरिया ने अगस्त 2013 में पंजाब मेल में पैंट्रीकार के ठेके का टेंडर डालने के लिए उससे 20 लाख रुपये उधार मांगे थे। इस पर उसने अपने बैंक खाते से पांच लाख और नौ लाख के दो डिमांड ड्राफ्ट व बेटे मोहम्मद नासिर के खाते से 4,42,500 का बैंक ड्राफ्ट फाइनेंशियल एडवाइजर एंड चीफ अकाउंट ऑफिसर सेंट्रल रेलवेज मुंबई के नाम बनवाकर राजा साहब को दिए थे। टेंडर स्वीकृत न होने पर रेलवे ने यह राशि राजा साहब के बैंक खाते में वापस भेज दी थी। राजा साहब ने यह रकम अपने खाते से निकाल ली थी। रुपये वापस मांगने पर 10-10 लाख रुपये के दो चेक थमा दिए थे। जो तय अवधि में बैंक में लगाने पर बाउंस हो गए। इस मामले में अधीनस्थ न्यायालय ने 12 दिसंबर 2022 को अभियुक्त राजा साहब भदौरिया को दो साल के सश्रम कारवास की सजा सुनाई थी। 31 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया गया था। अभियुक्त की ओर से ऊपरी अदालत में अपील की गई थी। अपर सत्र न्यायाधीश ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद अपील खारिज करते हुए अधीनस्थ न्यायालय की सजा को बरकरार रखा है। ऐसे में अभियुक्त राजा साहब भदौरिया को दो साल का सश्रम कारावास भुगतना होगा। साथ ही 31 लाख रुपये का जुर्माना अदा करना होगा। जुर्माना जमा न करने पर उसे छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगताना होगा।