- मुकदमे के दौरान वादी और दो अभियुक्तों की हो चुकी है मौत
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। विशेष न्यायाधीश अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम शक्तिपुत्र तोमर की अदालत ने मां-बेटे को जातिसूचक शब्दों से अपमानित करने व हमला करने का आरोप सिद्ध होने पर दो अभियुक्तों को तीन-तीन साल के कारावास की सजा सुनाई। मामला 21 साल पुराना है। मुकदमे के दौरान वादी और दो अभियुक्तों की मौत हो गई थी।
लोक अभियोजक केशवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि मऊरानीपुर के ग्राम देवरी सिंहपुरा निवासी नंदलाल ने मऊरानीपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसमें बताया था कि सात अप्रैल 2002 को उसका बेटा हैंडपंप पर पानी भरने गया था। वहां गांव का वीरेंद्र नहा रहा था। पानी के छींटे पड़ने पर वीरेंद्र ने बेटे के साथ गाली-गलौज करते हुए मारपीट कर दी। इस बात का उलाहना देने जब पत्नी कैलाशी विपक्षी के घर गई तो वहां मौजूद मोहनलाल, वीरेंद्र, हरपाल व जुगलकिशोर ने पत्नी और बेटे को गालियां देते हुए जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया। इतना ही नहीं, पत्नी पर फरसे से हमला भी किया, जिससे वह वहां बेहोश होकर गिर गई थी। पुलिस ने घटना का मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया था। न्यायालय ने अभियुक्त वीरेंद्र व हरप्रसाद को हमला करने तीन साल और और जातिसूचक शब्दों से अपमानित करने पर तीन साल के कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा अन्य धाराओं में भी सजा सुनाई गई। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। इसके अलावा न्यायालय ने अर्थदंड भी लगाया, जिसकी अदायगी न करने पर अभियुक्तों को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। दौरान मुकदमा अभियुक्त जुगल किशोर व मोहनलाल की मौत हो गई थी। जबकि, वादी नंदलाल की भी मौत हो गई थी।