झांसी। बबीना स्थित सैन्य इलाके में हथगोले से पीतल निकालने की कोशिश के दौरान उसमें विस्फोट हो गया। इसकी चपेट में आकर दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। एक युवक की वहां पहुंचते ही मौत हो गई जबकि दूसरे की मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान मौत हो गई। पुलिस पूरे मामले की पड़ताल कर रही है।
थाना बबीना के बुढ़पुरा के मजरा हरपालपुरा निवासी राजेश (43) पुत्र गोटीराम एवं रामजी (30) पुत्र रामस्वरूप गांव में रहकर छोटा-मोटा काम करते थे। उन दोनों को गांव से सटे फायरिंग रेंज से एक निष्क्रिय हथगोला मिला था। इसे उन लोगों ने अपने पास रखा था। ग्रामीणों के मुताबिक बुधवार सुबह दोनों गांव में नहर के नीचे हथगोले के स्क्रैप को तोड़कर उसमें से पीतल बाहर निकालने की कोशिश कर रहे थे। अचानक गोला विस्फोट कर गया। दोनों ही इसकी चपेट में आ गए। उनके चेहरे, सिर एवं पेट में गंभीर चोट आई। खून से लथपथ होकर दोनों वहीं गिर पड़े। तेज धमाके की आवाज सुनते ही ग्रामीण भी आ जुटे। उन्होंने घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दी। थोड़ी देर में भारी पुलिस बल भी मौके पर पहुंच गया।
गंभीर हालत में दोनों को पास के सीएचसी सेंटर ले जाया गया। चिकित्सकों ने राजेश को पहुंचते ही मृत्य घोषित कर दिया जबकि रामजी को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। पुलिस ने रामजी को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया लेकिन, अत्याधिक खून बह जाने से थोड़ी देर बाद उपचार के दौरान उसकी भी मौत हो गई। पुलिस ने दोनों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे। घटना के बाद से पूरे गांव में कोहराम मच गया। दोनों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। सीओ सदर हिमांशु गौरव के मुताबिक प्रथम दृष्टया मामला स्क्रैप बीनने का है लेकिन, हथगोला उनके हाथ कैसे आया, इसकी जांच कराई जा रही।
सौ मीटर का पूरा इलाका सील
स्क्रैप फटने की सूचना जैसे ही सेना को मिली वह भी हरकत में आ गई। सैन्य अधिकारियों ने घटनास्थल से 100 मीटर इलाके को पूरी तरह सील कर दिया। वहां आसपास किसी को भी फटकने की इजाजत नहीं दी गई। सेना की सख्ती के बावजूद आसपास तमाशबीनों का जमावड़ा लगा रहा। वहां से लोगों को खदेड़ने में पुलिस को भी काफी मशक्कत करनी पड़ी। वहीं, सैन्य अफसरों ने भी घटना स्थल का जायजा लेकर पूरे मामले की पड़ताल शुरू कर दी है।
पहले भी कई गवां चुके जान
बबीना के सैन्य इलाके में ही फील्ड फायरिंग रेंज भी है। इसमें अकसर सेना अभ्यास करती है। इससे कई गांवों की सीमा में जुड़ी हुई है। अभ्यास के दौरान गोला-बारूद का भी इस्तेमाल होता है। सैन्य अधिकारियों के मुताबिक अभ्यास के दौरान सावधानी बरती जाती है। विस्फोट न होने वाले गोला-बारूद हटा दिए जाते हैं लेकिन, कई बार वह छूट जाते हैं। आसपास गांव के कई लोग अकसर इनमें भरे पीतल के लालच में इसको बीनने की फिराक में यहां आते हैं। हथगोले के साथ ही गोलियों के खोखे ग्रामीण बीनकर ले जाते हैं। इसी पीतल को निकालने के फेर में राजेश एवं रामजी को अपनी जान गंवानी पड़ी। पुलिस के मुताबिक इसी वजह से यहां पहले भी कई बार हादसे हो चुके। जिसमें लोग अपनी जान गवां चुके हैं।