झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों के प्लाज्मा का एक बार फिर से टोटा हो गया है। मौजूदा समय में सिर्फ तीन प्लाज्मा ही बचे हुए हैं। इसमें भी दो एक ही ग्रुप के हैं। छह रक्त समूहों का एक भी प्लाज्मा कोरोना को मात देने वाले व्यक्ति का नहीं है। ऐसे में इन ब्लड ग्रुपों के किसी भी कोविड मरीज को प्लाज्मा थैरेपी की जरूरत पड़ जाती है तो बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी।
प्लाज्मा थेरेपी के काफी सकारात्मक परिणाम सामने आ चुके हैं। झांसी मेडिकल कॉलेज में ही छह में से पांच गंभीर कोरोना मरीजों की सेहत में सुधार हो चुका है। हालांकि, एक की मौत भी हो चुकी है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि प्लाज्मा थेरेपी ने ज्यादातर मरीजों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई है। मगर पहले तो कोविड को मात देकर ठीक होने वाले लोगों ने प्लाज्मा डोनेट करने में रुचि दिखाई। लेकिन बाद में लोगों ने अपने कदम नहीं बढ़ाए। इसी वजह से मौजूदा समय में मेडिकल
कॉलेज में प्लाज्मा का टोटा हो गया है। अभी सिर्फ तीन प्लाज्मा बचे हुए हैं। इसमें दो ओ-पॉजिटिव और एक ए-पॉजिटिव हैं। बाकी, अन्य ब्लड ग्रुप का एक भी प्लाज्मा मेडिकल कॉलेज में नहीं है। ऐसे में दो ब्लड ग्रुपों को छोड़कर किसी भी अन्य ग्रुप के कोरोना के गंभीर मरीज को प्लाज्मा की जरूरत पड़ गई तो दिक्कत हो सकती है।
आपका प्लाज्मा बचा सकता है दो कोविड मरीजों की जान
कोरोना को मात देकर ठीक हो चुके लोगों से अमर उजाला अपील करता है कि वह प्लाज्मा डोनेट करने के लिए आगे आएं। आपका एक प्लाज्मा दो लोगों की जान बचा सकता है। अभी तक मार्केट में प्लाज्मा की वैक्सीन नहीं आई है। ऐसे में गंभीर कोरोना मरीजों के लिए प्लाज्मा थेरेपी ही असरदार दवा के तौर पर देखी जा रही है। प्लाज्मा डोनेट करने से किसी को किसी भी प्रकार की समस्या नहीं होती है। इसलिए कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आने के 14 दिन बाद या फिर कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट आने के 28 दिन बाद व्यक्ति मेडिकल कॉलेज में संपर्क कर अपना प्लाज्मा डोनेट कर सकता है।