11 साल पुराने मामले में कोर्ट ने सुनाया फैसला, पुनर्वास के लिए पीड़िता को दिए जाएंगे 50 हजार
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। नाबालिग से दुष्कर्म करने पर अभियुक्त को पॉक्सो कोर्ट के विशेष न्यायाधीश नेयाज अहमद अंसारी ने बीस साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। दोषी पर 1.20 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। इसमें से 50 हजार रुपये पीड़िता को पुनर्वास के लिए दिए जाएंगे। अर्थदंड न देने की दशा में अभियुक्त दो साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
विशेष लोक अभियोजक नरेंद्र कुमार खरे के मुताबिक 8 फरवरी 2013 को पीड़िता के पिता ने चिरगांव थाने में तहरीर देते हुए बताया कि उसकी 16 साल की बेटी एक महाविद्यालय में बीए प्रथम वर्ष में पढ़ती है। छह फरवरी 2013 को वह घर से कॉलेज के लिए निकली लेकिन, शाम को लौटकर घर नहीं आई। कॉलेज और सहेलियों से पता करने पर भी उसके बारे में मालूम नहीं चला। दामाद ने बताया कि छात्रा को चिरगांव के करगुवां गांव निवासी विक्रम सिंह कार में बैठाकर उरई ले जा रहा था। आरोपी विक्रम ने छात्रा के साथ दुष्कर्म किया। पिता की तहरीर पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करके आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। विवेचना करने के बाद कोर्ट में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की। करीब 11 साल तक चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने आरोपी विक्रम को आईपीसी की धारा 366 के अंतर्गत 10 साल एवं पॉक्सो एक्ट की धारा 5(एल) के तहत बीस साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।