झांसी के मोंठ थाना इलाके के कुम्हरार रोड पर ओवरब्रिज के पास खुले में सो रहे दो युवकों को ट्रक ने कुचल दिया। उनकी मौके ही दर्दनाक मौत हो गई। ट्रक बैक करने के दौरान यह हादसा हुआ था। घटना के बाद चालक ट्रक छोड़कर भाग गया। त्योहार पर दो युवकों की मौत से क्षेत्र का माहौल गमगीन बना हुआ है।
कुम्हरार रोड के ओवरब्रिज के पास बालू डंप की जाती है। इसी डंपिंग परिसर में शुक्रवार की रात समथर के महुआखेरा निवासी दयासागर उर्फ छुन्ना राजपूत (25) और मोंठ के अटरिया गांव निवासी धर्मेंद्र पाल (27) खुले में सो रहे थे। रात तकरीबन 11 बजे एक ट्रक यहां बालू की उठान के लिए पहुंचा था। लेकिन, वहां बालू का उठान नहीं हो रहा था। इस पर चालक ट्रक को बैक कर लौटने लगा। ट्रक को पीछे ले जाते समय वह वहां सो रहे युवकों को नहीं देख पाया, जिससे दोनों युवक ट्रक के पिछले पहियों के नीचे आ गए।
युवकों की चीख-पुकार सुनकर चालक ट्रक को मौके पर छोड़कर भाग गया। घटना के समय परिसर में अन्य कर्मचारी भी झोपड़ियों में सो रहे थे। युवकों के चीख सुनकर वह लोग घटना स्थल पर पहुंचे। सूचना मिलने पर सीओ मोंठ स्नेहा तिवारी भी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंच गईं। दोनों युवकों को आनन-फानन एंबुलेंस से मोंठ अस्पताल भेजा गया। यहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। शनिवार की दोपहर में पोस्टमार्टम के बाद दोनों के शव परिजनों के हवाले कर दिए गए।
मृतक छुन्ना राजपूत बालू घाट पर काम करता था, जबकि धर्मेंद्र पाल जिला पंचायत के बैरियर पर काम करता था।
हादसे में जान गंवाने वाला दयासागर उर्फ छुन्ना राजपूत समथर के ग्राम महुआखेरा निवासी बृजकिशोर राजपूत का इकलौता पुत्र था। पांच महीने पहले ही उसकी शादी मप्र के ग्राम बड़ैरा सौपान में हुई थी। रात में वह कभी-कभी गांव नहीं जाता था और डंपिंग परिसर में ही सो जाता था। वह क्षेत्रीय भाजपा नेता दयाशंकर राजपूत का भतीजा था। शनिवार की शाम तकरीबन छह बजे मृतक का शव घर पहुंचा। पूरे गांव का माहौल गमगीन हो उठा। पत्नी व अन्य परिजनों का बुरा हाल रहा।
चार-चार साल के अंतराल में हुई तीन भाइयों की मौत
ग्राम अटरिया निवासी रामाधार पाल के तीन पुत्र थे। उनका बड़ा बेटा चंद्रपाल करीब आठ साले पहले काम के लिए बाहर गया था। वहां उसकी सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। दूसरे बेटे यशपाल की चार साल पहले ग्राम अटरिया और अमरा के बीच सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। जबकि, तीसरे बेटे धर्मेंद्र की मौत बीती रात ट्रक से कुचलने से हो गई। रामाधर के परिवार में अब उनकी पत्नी उमा तथा वृद्ध पिता श्यामलाल ही हैं। रामाधार लघु कृषक हैं और मेहनत मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करते हैं। शनिवार की शाम धर्मेंद्र का शव गांव पहुंचा। अंतिम संस्कार के दौरान सभी की आंखें नम हो उठीं।