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साहित्यकार त्रिभुवन नाथ त्रिवेदी नहीं रहे

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त्रिभुवन नाथ त्रिवेदी - फोटो : REPORTERS
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झांसी। बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉ. त्रिभुवन नाथ त्रिवेदी नहीं रहे। 87 वर्ष की आयु में उनका घर पर निधन हो गया। अपने इस जीवनकाल में उन्होंने साहित्य के क्षेत्र में तो नाम कमाया ही, राजनीति में भी उनका कोई सानी नहीं था। अयोध्या के श्रीराम मंदिर का आंदोलन हो या आपातकाल, डॉ. त्रिभुवन नाथ त्रिवेदी हमेशा आगे रहे। आपातकाल में तो उन्हें 19 माह जेल में बंद रखा गया।
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सीपरी प्रेमगंज में 1932 में जन्मे त्रिभुवन नाथ त्रिवेदी का लगाव शुरू से ही साहित्य और राजनीतिक गतिविधियों में रहा। वह विश्व हिंदू परिषद के प्रांतीय उपाध्यक्ष और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सक्रिय सदस्य रहे। त्रिवेदी जी अयोध्या आंदोलन के दौरान उरई जेल में बंद रहे। उन्होंने 1974 व 1984 में विधायक का चुनाव भी लड़ा। एसपीआई के प्राचार्य रहे डॉ. त्रिवेदी ने बुद्ध प्रकाश, अंतिम वनवास महाकाव्य के अलावा कई अन्य पुस्तकें भी लिखीं। पुत्र रंजन त्रिवेदी और बृजेश त्रिवेदी ने बताया कि 23 नवंबर को उनका घर पर देहांत हो गया। उनका नंदनपुरा में अंतिम संस्कार किया गया। लोकतंत्र सेनानी होने के कारण उन्हें तिरंगे में लपेटा गया। सशस्त्र गार्डों ने सलामी भी दी।
इधर एसपीआई इंटर कालेज में प्रधानाचार्य डॉ. मनोज कुमार मिश्रा व अन्य शिक्षकों ने, लोकतंत्र सेनानी परिषद कार्यालय में लोकतंत्र सेनानी नरोत्तम स्वामी, गिरीश चंद्र सक्सेना, हरीमोहन गुप्ता, डॉ. धन्नू लाल गौतम ने, सीपरी बाजार न्यू रायगंज में स्वतंत्र अभिव्यक्ति मंच के उमाशंकर बिलगैया, पंकज मिश्रा, संजय त्रिपाठी ने लोकतंत्र सेनानी त्रिभुवन नाथ त्रिवेदी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
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