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ट्रेनों की संभाल रहीं कमान, हजारों मुसाफिरों की बन चुकीं सारथी

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झांसी। आज के दौर में महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं हैं। खुद को साबित करने के लिए महिलाएं चुनौतीपूर्ण काम कर रही हैं। झांसी मंडल में ट्रेनें दौड़ा रहीं महिला लोको पायलट इसका जीता जागता उदाहरण हैं। साल 2007 तक झांसी मंडल में एक भी महिला लोको पायलट नहीं थी, लेकिन अब 55 महिला लोको पायलट एक्सप्रेस और माल गाड़ियां दौड़ा रही हैं। इन महिला लोको पायलट को ट्रेन की ड्राइविंग सीट पर बैठा देख लोग कई बार चौंक जाते हैं, लेकिन इनके हौसले के साथ ट्रेन रफ्तार से दौड़ती है।
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झांसी मंडल में मौजूदा समय में 55 महिला लोको पायलट हैं। ये महिलाएं झांसी-बीना, झांसी-कानपुर और झांसी-आगरा रूट पर मालगाड़ियां और एक्सप्रेस ट्रेनें लेकर चल रही हैं। हालांकि पुरुषों के आगे इनकी संख्या काफी कम हैं, लेकिन बेहतर माहौल के चलते लगातार महिला लोको पायलट की संख्या बढ़ रही है। साल 2007 में एक भी महिला लोको पायलट नहीं थी, लेकिन धीरे-धीरे यह आंकड़ा बढ़कर 55 हो गया है। मौजूदा समय में तीन ड्राइवर और 52 सहायक लोको पायलट के तौर पर काम कर रही हैं।
झांसी में गुड्स लोको पायलट के तौर पर तैनात कौशल्या देवी हर इंजन को चलाने में माहिर हैं। मौजूदा समय में वे मालगाड़ी लेकर आगरा और बीना जाती हैं। कई बार रनिंग रूम में रुकना पड़ता है। सिग्नल को देखना और ट्रैक पर निगाह रखने के साथ वे इंजन का पूरा दारोमदार संभालती हैं। साल 2013 में लोको पायलट बनने के बाद वे काफी समय तक एक्सप्रेस ट्रेन में चलाती थीं। इस दौरान लोग उनको देखकर चौंक जाते थे। वे कहती हैं कि ट्रेन चलाना चुनौती पूर्ण काम है, लेकिन इसमें अच्छा लगता है।
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इसके साथ ही, सहायक लोको पायलट आकांक्षा गुप्ता भी 2015 से ट्रेनों की कमान संभालती हैं। झांसी की निवासी आकांक्षा पहले नागपुर मंडल में थी। जहां उन्होंने कई ट्रेनों का संचालन किया। वे कहती हैं कि ट्रेन चलाने के दौरान सतर्क रहना होता है। एक मिनट की लापरवाही भी मुसीबत बन सकती है। इसके लिए उनको रेलवे की ओर से समय-समय पर प्रशिक्षण दिया जाता है।
महिला कर्मचारी संभालेंगीं बुंदेलखंड एक्सप्रेस की कमान
झांसी। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर रेलवे नई पहल करने जा रहा है। आठ मार्च को महिला कर्मचारी बुंदेलखंड एक्सप्रेस की कमान संभालेंगीं। झांसी से ग्वालियर तक महिला कर्मचारी ही ट्रेन लेकर जाएंगीं। इसके लिए तैयारी शुरू कर दी गई है। रेलवे समय-समय पर महिला कर्मचारियों की सुविधा के लिए कवायदें करता रहा है। इस बार भी आठ मार्च को महिला दिवस पर बुंदेलखंड एक्सप्रेस में महिला ड्राइवर, सहायक लोको पायलट, गार्ड, टीटीई समेत सभी कर्मचारी महिलाएं होंगीं। इसके साथ ही झांसी स्टेशन पर भी महिलाएं ही पूरा जिम्मा संभालेंगीं। पीआरओ मनोज कुमार सिंह के मुताबिक रेलवे महिला कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने के लिए पहल कर रहा है।
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