झांसी। सोचिए आपको अपने घर में शौचालय बनवाना है तो कितना समय और पैसा खर्च करना पड़ेगा। समय एक सप्ताह से 15 दिन और खर्च 10 से 15 हजार रुपये। लेकिन पंचायत राज विभाग के कर्मचारी कई महीनों में वह काम पूरा नहीं करा पाते हैं, जिसे आम लोग महज एक पखवाड़े में करा लेते हैं। जाहिर है विभागीय अधिकारी भी कर्मचारियों की इस लापरवाही पर ध्यान नहीं दे रहे हैं जिससे शौचालय निर्माण कार्य अधूरे हैं।
वित्तीय वर्ष 2015-16 में जनपद में 3117 शौचालयों के निर्माण कार्य व्यक्तिगत घरेलू उपयोग के लिए कराने को स्वीकृत हुए थे। सभी के लिए पैसा भी निर्गत हो चुका है, लेकिन आधे से अधिक समय बीतने के बाद भी एक तिहाई शौचालय ही पूर्ण हो पाए हैं। शासन ने बबीना ब्लाक के लिए 415, बड़ागांव ब्लाक में 484, चिरगांव में 141, मोंठ में 427, मऊरानीपुर में 387, बंगरा में 352, गुरसरांय में 411 व बामौर में 500 शौचालय बनवाने के लिए स्वीकृति दी थी। सभी के लिए पैसा भी जारी कर दिया गया है लेकिन काम कछुए की चाल से चल रहा है।
बबीना ब्लाक में अब तक मात्र 55, बड़ागांव ब्लाक में 173, चिरगांव में 40, मोंठ में 306, मऊरानीपुर में 209, बंगरा में 155, गुरसरांय में 194 और बामौर में 206 शौचालय ही बन सके हैं। ग्रामीण स्तर पर मौजूद पंचायत विभाग के जिम्मेदार गति को बढ़ाने के लिए गंभीर नहीं हैं, वहीं ब्लाक स्तर पर बैठे विभागीय अफसर उनकी निगरानी करना जरूरी नहीं समझ रहे हैं। ।
शौचालयों को साफ रखने की व्यवस्था नहीं
झांसी। विभिन्न योजनाओं से शौचालय निर्माण होने के बावजूद लोग खुले में शौच क्यों जाते हैं? थाना मोंठ के ग्राम अमरा में सोमवार सुबह सड़क किनारे शौच कर रहीं दो महिलाओं व एक बच्चे की ट्रक के रौंदने से हुई मौत ने सरकारी योजनाओं पर यह सवाल खड़ा कर दिया है। मरने वाले तीनों के घर शौचालय नहीं था।
हादसे में मृत तीनों के घर भले ही शौचालय न बना हो, लेकिन उनके गांव अमरा में लगभग 510 शौचालय विभिन्न योजनाओं के तहत बनवाए गए हैं। सवाल यह है कि गांव में सार्वजनिक शौचालय क्यों नहीं बनवाया गया। यदि गांव में सार्वजनिक शौचालय होते तो शायद यह लोग खुले में शौच को नहीं जातीं और यह हादसा नहीं होता। लेकिन, जहां सार्वजनिक शौचालय बने भी हैं, वहां गंदगी के कारण लोग उनका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।
जिले की 437 ग्राम पंचायतों के लिए 819 सफाई कर्मचारी तैनात हैं। इनमें से दर्जनों तो अफसरों की जी हुजूरी में कार्यरत हैं, शेष इतने नहीं है कि सभी ग्रामों के लिए पर्याप्त हों। स्थिति यह है कि गांवों में नियमित सफाई होना संभव नहीं हो पा रहा है, ऐसे में सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति का अंदाजा स्वयं ही लगाया जा सकता है।
वर्जन-
विभिन्न योजनाओं से जिले में शौचालय बनाए जा रहे हैं। सरकार की मंशा है कि हर घर में शौचालय हो। इसी मंशा के सापेक्ष विभाग काम कर रहा है। लोगों को भी चाहिए कि खुले में शौच करने न जाएं और योजनाओं का लाभ लेकर अपने घर में शौचालय जरूर बनवाएं।
- केके सिंह, डीपीआरओ