झांसी। बुंदेलखंड में सूखे, उसके असर और सरकारी योजनाओं के आम जनमानस को मिलने वाले लाभ का पता लगाने आए आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता व स्वराज अभियान के संस्थापक योगेंद्र यादव ने परमार्थ कम्यूनिटी केयर सेंटर में अपनी पाठशाला लगाई। पाठशाला में उन्होंने स्वयं सेवियों को सूखा और अकाल के बीच का अंतर समझाते हुए बताया कि कैसे वैज्ञानिक विधि से सर्वेक्षण कार्य किया जाना है। उधर, बुंदेलखंड के सूखा पीड़ित किसानों की व्यथा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को सुनाने के लिए योगेंद्र यादव लखनऊ रवाना हो गए हैं।
दिल्ली, गुजरात, हरियाणा समेत देश के अलग-अलग हिस्सों से आए 108 स्वयं सेवियों को संबोधित करते हुए योगेंद्र ने कहा कि देश के 40 प्रतिशत इलाके सूखाग्रस्त हैं। इसके बावजूद देश में सूखा मुद्दा ही नहीं है। सूखा हमारी सभ्यता के लिए कलंक है। मौजूदा समय में सूखा सबसे बड़ी त्रासदी है, जो सबसे पहले गरीब तबके को प्रभावित करता है। मराठवाड़ा का सूखा इसलिए चर्चा में है क्योंकि वहां नाना पाटेकर हैं।
बुंदेलखंड के पास नाना पाटेकर नहीं हैं, इसलिए यहां के सूखे की खबर नहीं बनती। अब जरूरी हो गया है कि बुंदेलखंड के सूखे की सूचनाएं एकत्र कर दुनिया को इसका सच बताया जाए। सर्वे के लिए गांवों को रेंडम आधार पर चुना गया है। मंगलवार से एक सप्ताह के लिए कार्यकर्ता 200 गांवों में कूच कर सर्वेक्षण करेंगे। वैज्ञानिक विधि से सर्वे को पूर्ण किया जाएगा।
लखनऊ से आए स्वराज अभियान के वरिष्ठ कार्यकर्ता राजीव ग्यानी ने प्रशिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वीआर शास्त्री ने स्वयं सेवियों को सर्वे के अहम बिंदु बताए। परमार्थ के प्रमुख संजय सिंह ने कहा कि सर्वे की रिपोर्ट से वास्तविक परिस्थिति सामने आयेगी। इस दौरान सतीश चंद्र, अवधेश कटियार, अरविंद कुमार, कृष्णानंद यादव, मुकेश, कैलाश, अमोद कुमार सिंह, महेंद्र, जव्वाद अहमद, भगत सिंह, रमणीक कुमार, दीपक भगत, गौरीशंकर, राम एस यादव, भूपेंद्र कुमार झा, सच्चिदानंद, राजेश्वरी, ठाकुर दास, मुकुंदराज सरवदे लोग उपस्थित रहे।
उधर, योगेंद्र यादव देर रात लखनऊ के लिए रवाना हो गए हैं। वहां वह मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मंगलवार (आज) को मिलकर बुंदेलखंड के सूखा पीड़ित किसानों की व्यथा सुनाएंगे।