झांसी। जनपद के 494 ग्राम प्रधानों से आज आधी रात कुर्सी छिन जाएगी। इसके बाद उनके नाम के आगे पूर्व प्रधान संबोधन लग जाएगा। कार्यकाल खत्म होने के साथ उनके सभी वित्तीय अधिकार भी सीज कर दिए जाएंगे। इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिए गए। प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने पर बतौर प्रशासक सहायक विकास अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी जा रही है।
ग्राम पंचायतों का गठन 25 दिसंबर 2015 को हुआ था। इसी दिन ग्राम प्रधानों को शपथ भी दिलाई गई। जनपद में कुल 496 ग्राम पंचायतें हैं लेकिन, पलींदा एवं मथुरापुरा ग्राम पंचायत में कई बार उपचुनाव कराए जाने के बावजूद वहां प्रधान नहीं चुने जा सके। शेष 494 ग्राम पंचायतों का पांच साल का कार्यकाल पूरा होने पर शुक्रवार की आधी रात प्रधान समेत ग्राम पंचायत सदस्य पैदल हो जाएंगे। कार्यकाल खत्म होने के साथ उनके वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार भी सीज कर दिए जाएंगे।
जिलाधिकारी आंद्रा वामसी ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए। इसके मुताबिक आधी रात से ही ग्राम प्रधान चेकर के रूप में कोई भुगतान नहीं कर सकेंगे। सभी ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधानों की डीएससी ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर आधी रात से अनरजिस्टर्ड कर दी जाएगी। उनके अनरजिस्टर्ड होने के बाद शासन से नामित प्रतिनिधि के चेकर की डीएससी ई-स्वराज पोर्टल पर रजिस्टर्ड की जाएगी। जिलाधिकारी की ओर से कार्यकाल खत्म होने के बाद पोर्टल पर ग्राम प्रधान की ओर से एफटीओ एप्रूव किए जाने पर ग्राम पंचायत सचिव, संबंधित विकास खंड के सहायक विकास अधिकारी एवं खंड विकास अधिकारी को जिम्मेदार ठहराने का अल्टीमेटम दिया गया है। ग्राम प्रधान के स्थान पर पंचायत की गतिविधि संचालित करने के लिए एडीओ को प्रशासक बनाया जाएगा। हालांकि अभी तक इस संबंध में आदेश नहीं आया है। डीपीआरओ जगदीश राम के मुताबिक शासन के आदेश का इंतजार किया जा रहा।
पांच उपचुनाव के बावजूद नहीं चुने गए पलींदा एवं मथुरापुरा में प्रधान
अनुसूचित जनजाति वर्ग में सीट आरक्षित होने के वजह से बबीना ब्लॉक के पलींदा एवं मथुरापुरा ग्राम पंचायत में पूरे पांच साल तक प्रधान की कुर्सी खाली ही पड़ी रही। यहां प्रधान के निर्वाचन के लिए पांच बार उपचुनाव भी कराए गए लेकिन, इस वर्ग का एक भी उम्मीदवार सामने नहीं आया। इसके चलते दोनों ही ग्राम पंचायतों में सचिव के माध्यम से पांच साल काम काज चलाया गया। इन दो पंचायतों में ग्राम पंचायत सदस्य की चार सीटें भी आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार न मिलने से पूरे पांच साल खाली पड़ी रहीं।
काम निपटाने में जुटे रहे प्रधान
कार्यकाल खत्म होने के चंद घंटे शेष बचे होने पर ग्राम प्रधानों ने धड़ाधड़ काम निपटाने शुरू कर दिए। हालांकि तमाम ग्राम सभाओं में सामुदायिक शौचालय, पंचायत भवन, गोशाला समेत सरकारी योजनाओं में ही ज्यादातर पैसे खर्च हो गए लेकिन, इसके बावजूद कई ग्राम पंचायतों के पास अपनी निधि बची हुई है। ग्राम प्रधान आखिरी दौर में इसे निपटाने में जुटे रहे। डीपीआरओ कार्यालय में भी आज सारा दिन सरगर्मी दिखाई पड़ी।
महिला प्रधान को जाना पड़ा जेल, जांच के दायरे में घिरे रहे दूसरे प्रधान
मनरेगा एवं आवास योजना को लेकर आई सर्वाधिक शिकायतें
कार्यकाल खत्म होने तक कई ग्राम प्रधान वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप में घिरे रहे। सबसे अधिक मनरेगा एवं प्रधानमंत्री आवास योजना की शिकायतों में प्रधान घिरे रहे। इन योजनाओं में ही वित्तीय अनियमिता बरतने पर सकरार की ग्राम प्रधान शशि यादव को जेल भी जाना पड़ा। झांसी में किसी महिला प्रधान के जेल जाने की यह पहली घटना थी। इसके अलावा बमौर की समेरी ग्राम प्रधान शिवादेवी, बबीना ब्लॉक के खजराहाबुजुर्ग के ग्राम प्रधान हरनाम सिंह, मऊरानीपुर ब्लॉक के गढ़वा ग्राम प्रधान रामप्रसाद पर भी मनरेगा के काम में गड़बड़ी करने के आरोप साबित हुए। इन सभी से रिकवरी भी की गई। इसके अलावा अभी भी डेढ़ दर्जन से अधिक ग्राम प्रधानों के खिलाफ वित्तीय गड़बड़ी की शिकायतों के मामले में जांच चल रही है। अधिकारियों का कहना है कार्यकाल खत्म होने के बाद जांच में अगर प्रधान दोषी पाए गए तब, उनसे भू-राजस्व के तौर पर रिकवरी की जाएगी।
एक नजर में पंचायत
ग्राम पंचायतें 496
निर्वाचित ग्राम प्रधान 494
ब्लॉक 8
पंचायत सदस्य 6170
क्षेत्र पंचायत सदस्य 599
जिला पंचायत सदस्य 24