प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा, कृषि में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य किसानों को उत्पादक के साथ ही उद्यमी बनाने का भी है। जब किसान और खेती उद्योग के रूप में आगे बढ़ेंगे तो बड़े स्तर पर गांव में और गांव के पास ही रोजगार और स्वरोजगार के अवसर तैयार होंगे।
जब हम कृषि में आत्मनिर्भरता की बात करते हैं तो यह सिर्फ खाद्यान्न तक ही सीमित नहीं है, बल्कि गांव की पूरी अर्थव्यवस्था की आत्मनिर्भरता की बात है। यह देश में खेती से पैदा होने वाले उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ाकर करके देश और दुनिया के बाजारों में पहुंचाने का मिशन है।
उत्तर प्रदेश के झांसी में रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के शैक्षणिक एवं प्रशासनिक भवन का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बटन दबाकर उद्घाटन करने के बाद पीएम ने कहा, गांव के पास उद्योगों के समूह बनाने की व्यापक योजना बनाई गई है। इन उद्योगों को बेहतर बुनियादी सुविधा मिले, इसके लिए एक लाख करोड़ रुपये का विशेष फंड बनाया गया है।
इस फंड से हमारे कृषि उत्पादक संघ, किसान उत्पादक संगठन अब भंडारण से जुड़ा आधुनिक ढांचा भी तैयार कर पाएंगे और प्रसंस्करण से जुड़े उद्योग भी लगा पाएंगे। इससे कृषि क्षेत्र में पढ़ाई करने वाले युवाओं और उनके सभी साथी, इन सबको नए अवसर मिलेंगे, नए स्टार्टअप के लिए रास्ते बनेंगे।
पीएम ने कहा, कभी रानी लक्ष्मीबाई ने बुंदेलखंड की धरती पर गर्जना की थी-मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी। आज एक नई गर्जना की आवश्यकता है-मेरी झांसी-मेरा बुंदेलखंड आत्मनिर्भर भारत अभियान को सफल बनाने के लिए पूरी ताकत लगा देगा, एक नया अध्याय लिखेगा।
केन बेतवा लिंक से बदलेगी बुंदेलखंड की किस्मत
पीएम ने कहा, बुंदेलखंड के एक ओर बेतवा बहती और दूसरी और केन नदी बहती है। उत्तर दिशा में यमुना हैं। हालांकि, स्थितियां ऐसी हैं कि इन नदियों के पानी का पूरा लाभ पूरे क्षेत्र को नहीं मिल पाता है। इस स्थिति को बदलने के लिए भी केंद्र सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। केन बेतवा नदी लिंक परियोजना में इस क्षेत्र के भाग्य को बदलने की बहुत ताकत है।
इस दिशा में हम दोनों राज्य सरकारों के साथ लगातार संपर्क में हैं, काम कर रहे है। मुझे पूरा विश्वास है कि एक बार जब बुंदेलखंड को पर्याप्त जल मिलेगा तो यहां जीवन पूरी तरह से बदल जाएगा। बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे हो या फिर रक्षा कॉरिडोर से रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे। वह दिन दूर नहीं, जब बुंलेदखंड में ‘जय जवान, जय किसान और जय विज्ञान’ का मंत्र चारों दिशाओं में गूंजेगा।