संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। जीएसटी रिटर्न में 3.50 करोड़ रुपये के टायरों की खरीद दिखाकर टैक्स चोरी करने वाले ठेकेदार की मुश्किलें और बढ़ने जा रही हैं। विभाग ने मामले में तकनीकी जांच भी शुरू कर दी है। साथ ही टायरों की बिक्री करने वाली फर्म भी अब जीएसटी विभाग के रडार पर आ गई है। शुरुआती जांच में पता चला है कि विक्रेताओं ने एक बिल पर दो लोगों से लाभ कमाया है। जबकि, टायर एक ही व्यक्ति को बेचे गए हैं।
राज्य वस्तु एवं सेवा कर विभाग के दस्तावेज में दर्ज लोक निर्माण विभाग, नगर निगम और जेडीए के ठेकेदार अनुज तिवारी ने जीएसटी रिटर्न दाखिल कर यह घोषित किया था कि उन्होंने एक साल में वाहनों के लिए 3.50 करोड़ रुपये के टायर खरीदें हैं। लेकिन, उनके दावे जीएसटी अधिकारियों के गले नहीं उतर रहे थे। ऐसे में विभाग ने दोनों टायर विक्रेताओं के दस्तावेज और स्टाॅक की जांच की तो टैक्स चोरी की परतें खुलती चली गईं।
इसमें यह भी सामने आया कि दोनों विक्रेताओं ने ठेकेदार के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को टायर न के बराबर बेचे हैं। इसके बाद विभाग इस नतीजे पर पहुंचा कि टायर विक्रेता साहिल टायर्स और फुलेल टायर्स ने दूसरे लोगों को बेचे गए टायरों के असली बिल ठेकेदार को दे दिए हैं। मामले की गहराई में जाकर जांच की गई तो 65 लाख रुपये के टैक्स गबन का मामला खुल गया। अब विभाग अन्य ठेकेदारों के दस्तावेज का इस्तेमाल कर उक्त ठेकेदार के दावों का तकनीकी परीक्षण कर रहा है।
दूसरे ठेकेदार के दस्तावेज से किया मिलान
जीएसटी विभाग ने दूसरे ठेकेदार के द्वारा दाखिल रिटर्न की समीक्षा में पाया कि उसके पास 28 ट्रक हैं और उसने तीन माह में 40 लाख रुपये की गिट्टी का ट्रांसपोर्ट किया है। इसके लिए उक्त ठेकेदार ने मात्र 8 लाख रुपये के ही टायर खरीदे।
अधिकारियाें ने आठ घंटे किया सर्वे
मामला संज्ञान में आने के बाद जीएसटी विभाग के अधिकारी टायर विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों पर पहुंचे। यहां उन्होंने आठ घंटे के सर्वे में यहां टायरों के नंबर और बिलिंग का मिलान किया है। इसमें भी कई खामियां पाई गईं।
वर्जन
मामले में टायर विक्रेताओं ने भी एक बिल का इस्तेमाल दो बार लाभ कमाने के लिए किया है और साढ़े तीन करोड़ के टायरों का बिल ठेकेदार को दिया है। हम अब पूरे मामले में तकनीकी जांच भी करा रहे हैं।
एके सिंह, एडिश्नल कमिश्नर ग्रेड 2 एसआइबी।