बुधवार की सुबह होते ही पुखरायां रेल हादसे को तीन साल पूरे हो जाएंगे। इस हादसे में 153 यात्रियों की जानें चली गईं थीं। रेलवे जरूर इस दिन को भूल गया है, लेकिन इस हादसे में जिनकी जानें चली गईं थीं, उनका दर्द आज भी परिजनों में होगा। वहीं, इस हादसे को लेकर आज भी कई अनसुलझे सवाल हैं, जिनका जवाब नहीं मिल सका है।
20 नवंबर 2016 को तड़के 3.03 बजे पुखरायां और मलासा के बीच इंदौर-पटना एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। 14 डिब्बे क्षतिग्रस्त हो गए थे। इसमें 153 यात्रियों की मौत व 200 से अधिक जख्मी हो गए थे। इस हादसे ने पूरे देश को हिला दिया था। रेल संचालन को लेकर सवाल खड़े हो गए थे। इस हादसे को पूरे तीन साल हो गए। मगर, आज भी उक्त हादसे को लेकर कई अनसुलझे सवाल हैं। जैसे पुखरायां व मलासा स्टेशनों के बीच पटरियों के बदलने का समय हो चुका था तो हादसे के पहले तक क्यों नहीं बदला गया? अगर झांसी- कानपुर ट्रैक की पटरियां दुरुस्त थीं तो हादसे के पहले इस ट्रैक के कई सेक्शनों में कॉशन ऑर्डर पर ट्रेनों का संचालन क्यों करवाया जा रहा था? रास्ते में किन-किन स्टेशनों पर ट्रेन के प्रवेश व निकलते समय जांच हुई? बोगियों की ओवर हालिंग कब से नहीं हुई थी? रेल सेक्शन में रात में पेट्रोलिंग करवाई जा रही थी कि नहीं? हादसे के पूर्व अल्ट्रासॉनिक मशीनों से पटरियों की जांच क्यों नहीं करवाई जा रही थी? इन सभी सवालों के जवाब आज तक नहीं मिल सके हैं।
वहीं, हादसे की उच्च स्तरीय जांच चल रही थी। इस बीच बिहार के पश्चिम चंपारण में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस का दावा था कि तीनों आरोपी मोती पासवान, उमाशंकर पटेल और मुकेश यादव ने नेपाली नागरिक बृजेश गिरी के साथ ट्रेन को पलटाने की साजिश रची थी। इस गिरफ्तारी के बाद जांच को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
हादसे को याद नहीं रखना चाहता रेलवे
रेलवे भी वक्त के साथ हादसे को भूल गया है। उस वक्त के अधिकांश अफसर बदल चुके हैं, कर्मचारी जरूर मंडल के अलग- अलग स्टेशनों पर काम कर कर रहे हैं। जो अधिकारी हैं वे भी उन पलों को याद नहीं करना चाहते। हालांकि, रेलवे ने इस हादसे के बाद झांसी- कानपुर ट्रैक की उन पटरियों को जरूर बदल दिया, जो अपनी उम्र पूरी कर चुकी थी। इससे दुर्घटना की संभावना कम हो गई है। साथ ही झांसी कानपुर मार्ग पर डबल ट्रैक का भी काम चल रहा है।