कोरोना काल में रेलवे ऐसी घटनाओं से बचा रहा, जिसमें किसी घटना पर आर्थिक मदद देनी पड़ी हो। वैसे रेल दुर्घटना होने पर यात्रियों को तुरंत पचास हजार रुपये की अनुग्रह राशि उपलब्ध कराई जाती है। यह राशि प्रभावित यात्री व उसके परिजन को तभी दी जाती है, जब गलती रेलवे की होगी। हालांकि, इस साल तमाम ऐसी शिकायतें आईं हैं, जिनमें ट्रेन की चपेट या दूसरी घटनाओं में आए प्रभावित लोगों के परिजनों ने रेलवे से मुआवजे की मांग कर रखी है।
रेलवे के अंतर्गत होने वाली दुर्घटनाओं को दो धाराओं में बांटा गया है। धारा 124 में ऐसे मामलों को गिना जाता है, जिनमें किसी ट्रेन दुर्घटना, आग लगने आदि में यात्री की जान चली जाए या वह घायल हो जाए। यानी गलती रेलवे की हो। वहीं धारा 124 (ए) में वह दुर्घटनाएं आती हैं, जिनमें रेलवे अपनी गलती नहीं मानता है। जैसे कि रेलवे क्रासिंग पार करते समय कोई ट्रेन की चपेट में आ जाए या चलती ट्रेन से गिरकर दम तोड़ दे अथवा घायल हो जाए। ऐसे में यात्री का रेलवे पर कोई क्लेम नहीं बनता है।
रेलवे धारा 124 के अंतर्गत होने वाली दुर्घटनाओं में मृतक या घायलों को तुरंत अनुग्रह राशि उपलब्ध कराता है। पहले यात्री की मौत पर परिजनों को पंद्रह हजार रुपये मिलते थे, जिसे 2012 में बढ़ाकर पचास हजार रुपये कर दिया गया। इसी तरह गंभीर हालत की स्थिति में पंद्रह हजार व कम घायल होने पर पांच हजार रुपये दिए जाते हैं। जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि साल 2020 में कोई ऐसी घटना नहीं हुई, जिसमें रेलवे को अनुग्रह राशि प्रदान करनी पड़ी हो।