कोच मरम्मत कारखाने में नए वित्तीय सत्र में 65 डिब्बे बनकर तैयार होेंगे। रेल बोर्ड ने इस बार लक्ष्य तो बढ़ा दिया है, लेकिन स्टाफ की स्थिति बहुत खराब है। अभी भी 993 कर्मचारियों की जगह मात्र 140 कर्मचारी ही कारखाने में तैनात हैं। ऐसे में लक्ष्य पाना मुश्किल लग रहा है।
प्रेमनगर के महावीरन क्षेत्र में सौ करोड़ से अधिक लागत में तैयार हुए कोच मरम्मत कारखाने से अभी तक 50 कोच तैयार किए जा चुके हैं। कारखाने को नए वित्तीय सत्र में 65 कोच बनाने का लक्ष्य दिया गया है। पिछले सत्र में 40 कोच बनाने का लक्ष्य था, जिसे अंतिम समय तक पूरा कर लिया गया। इस बार लक्ष्य तो बढ़ा दिया गया, लेकिन स्टाफ नहीं बढ़ाया गया है।
दरअसल, रेलवे बोर्ड ने हर साल ढाई सौ कोच की मरम्मत का लक्ष्य बनाया था। कारखाने में बनी शॉप के हिसाब से 993 अधिकारी व कर्मचारियों के पद सृजित किए गए थे। मगर वर्तमान में 139 अधिकारी और कर्मचारियों की ही तैनाती है। इनमें सौ कर्मचारी ही कोच मरम्मत के काम में लगे हैं, बाकी विभागीय कार्यों में तैनात हैं। रेलवे ने पुराने नौ जोनों से मय पोस्ट के 24-24 (कुल 216) कर्मचारी देने के निर्देश दिए थे। मगर, यह कर्मचारी भी कारखाने को नहीं मिल सके। इस स्थिति को देखकर लग रहा है कि ढाई सौ कोचों का लक्ष्य पाने के लिए अभी वक्त लगेगा।
निजी कर्मचारियों से काम कराएंगे
रेलवे भर्ती बोर्ड में नई नियुक्ति के लिए प्रक्रिया चल रही है। जब तक कर्मचारियों की कमी पूरी नहीं होती हैं, तब तक प्राइवेट तरीके से काम कराया जाएगा। यही कारण है कि वित्तीय सत्र 2016-17 में 65 कोच निकालने का लक्ष्य दिया गया है। प्राइवेट कर्मचारियों की गंभीरता से निगरानी की जा रही है, ताकि संरक्षा से खिलवाड़ न हो।
- अतुल्य सिन्हा, मुख्य कारखाना प्रबंधक