गांव में बरिया वाले नाम से विराजे हनुमान जी का मंदिर
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मामला चिरगांव के ग्राम पट्टी कुम्हर्रा का है। 70 वर्षीय बुजुर्ग सीताराम अहिरवार पिछले 45 बर्षों से इस अनोखे अनुभव से गुजर रहे हैं। सीताराम अहिरवार ने बताया कि जब वह 25 वर्ष की युवावस्था में थे तब से अब तक वह चौदह बार सर्पदंश के शिकार हो चुके हैं। हालांकि उन्हें अभी तक कोई नुकसान नहीं हुआ है। उनका विश्वास है कि बरिया घाट वाले हनुमान जी की शक्ति उन्हें बचाती है। सीताराम के पुत्र फूल सिंह ने बताया कि सर्प काटने के दो दिन पहले उन्हें आभास हो जाता है। उसके बाद चाहे खेत में हों या घर पर सर्प काट लेता है। लेकिन वह केवल हनुमान जी के नाम का धागा बांध लेते हैं। जिससे जहर का असर नहीं हेाता है। हालांकि अभी तक वह अस्पताल नहीं गए हैं। यह सिलसिला हर दो तीन वर्ष बाद हेाता आ रहा है। केवल मंदिर पर धागा खोल दिया जाता है और स्थिति सामान्य हो जाती है।
ग्राम के विक्रम सिंह ने बताया कि गांव के बाहर बना हनुमान मंदिर करीब चार सौ वर्ष पुराना है। यहां पर मूर्ति नहीं पीठ स्थापित है। यह स्थान बरिया घाट बाले हनुमान जी के नाम से जाना जाता है। सर्प काटने के बाद लोग हनुमान जी का नाम लेकर ऊतरी यानि धागा बांध देते हैं। जिससे सर्प के जहर का कोई असर नहीं हेाता है। बाद में मंगलवार के दिन मंदिर पर आकर धागा खोल दिया जाता है। जिससे व्यक्ति सामान्य हो जाता है। यह सिलसिला काफी समय से चल रहा है।