दोस्ती ऊपर वाले का वह अनमोल तोहफा है जो किसी-किसी को ही मिलता है। कहते हैं सच्चा दोस्त साथ हो तो हर मुश्किल आसान हो जाती है। दोस्त की एक प्यार भरी थपकी एक पल में आपके आंसू रोक सकती है और दुख के पलों में सबसे मजबूत कंधा भी बनती है। इंटरनेशनल फ्रेंडशिप डे (30 जुलाई) पर हमने देखा कि झांसी में भी यारी-दोस्ती की बड़ी-बड़ी मिसालें हैं। बात चाहे हिंदू-मुस्लिम दोस्तों की हो या कोई और, दोस्ती निभाने वाले वर्षों से अपने दोस्त का हाथ थामे हैं। इन दोस्तों का कहना है कि ये दोस्ती उन्हें जान से भी ज्यादा प्यारी है...।
रफीक और ओमी की 34 साल पुरानी दोस्ती बनी है मिसाल
मस्जिद में अजान हो या मंदिर में पूजा, शहर के मो. रफीक और ओमी साथ-साथ ऊपर वाले को याद करते हैं। इनकी उम्र में भले की आठ साल का फर्क है, पर इनकी 34 साल की दोस्ती के चर्चे पूरे सीपरी बाजार में है। मो. रफीक सीपरी बाजार में एक टेलर हैं। इनकी उम्र 57 साल है। रफीक बताते हैं कि वर्ष 1988 में उनकी मुलाकात ओमी से हुई थी। दुआ-सलाम होते-होते दोनों में दोस्ती हो गई। उनकी शादी में कामकाज संभालने में ओमी सबसे आगे रहा। इसके बाद उन्होंने ओमी की शादी कराई। रफीक ने बताया कि वर्षों पहले खोली गई टेलर की दुकान में दोनों पार्टनरशिप में खूब काम करते हैं। इन दिनों सारा काम ओमी ही संभाल रहे हैं। उनकी पत्नी की हालत खराब होने पर ओमी ने छोटे भाई की तरह उनकी पत्नी की सेवा की। रफीक ने कहा कि उन दोनों के लिए मंदिर-मस्जिद एक हैं।
दोस्ती हो तो चंदन और दानिश के जैसी
सीपरी में चंदन और दानिश की दोस्ती उनके आसपास के युवाओं के लिए मिसाल है। दोनों झांसी के हाफिज सिद्दीकी स्कूल में साथ-साथ पढ़े हैं। इसके बाद साथ-साथ जूतों का बिजनेस भी शुरू किया। चंदन की उम्र आज 27 साल की है और दानिश 26 साल के हैं। दोनों का पारिवारिक भी आना-जाना है। वह एक-दूसरे को सम्मान देते हैं। धर्म कभी उनकी दोस्ती के आड़े नहीं आता। उनकी दोस्ती देखकर आसपास के लोग भी कहते हैं कि दोस्ती हो तो चंदन और दानिश के जैसी...।
छोटी सी मुलाकात 15 साल पुरानी दोस्ती में बदल चुकी
अभिषेक अवस्थी और राजा द्विवेदी की दोस्ती भी किसी से कम नहीं है। नौकरी के दौरान 15 साल पहले एक दूसरे से मिले यह दोनों दोस्त आज पार्टनरशिप में बिजनेस भी कर रहे हैं। अभिषेक बताते हैं कि वह पहले कानपुर में रहते थे और वहीं पारले-जी कंपनी में काम करते थे। राजा हिंदुस्तान लीवर में झांसी में काम करते थे। जान पहचान दोस्ती में बदल गई। दोनों में पारिवारिक माहौल हो गया। आज उनके जानने वाले दोनों की दोस्ती की मिसाल देते हैं।
कक्षा छह की दोस्ती आज भी है कायम
बंगरा ब्लॉक के बेसिक स्कूल में बतौर शिक्षक कार्यरत कपिल कंचन और रेलवे में कार्यरत स्वप्निल साहू की 20 साल पुरानी दोस्ती आज भी कायम है। दोनों झांसी सीकेसी स्कूल के छात्र हैं और कक्षा छह से दोस्त हैं। बड़ा बाजार में रहने वाले कपिल बताते हैं कि कॉलेज पूरा होने के बाद दोनों ट्यूशन पढ़ाते थे तो अक्सर जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे का खर्च उठाते थे। स्वप्निल नारायण बाग के पास रहते हैं। उनकी पोस्टिंग खंडवा (एमपी) में है। दोनों के परिवारों में भी काफी मेलजोल है। जब भी वक्त मिलता है, पुरानी यादें ताजा करते हैं।
25 साल से कायम है दोस्ती
सुंदर विहार कॉलोनी में रहने वाले नमक कारोबारी पुनीत अग्रवाल और गोंदू कंपाउंड में रहने वाले वकील शरद निगम की 25 साल पुरानी दोस्ती उनके पूरे ग्रुप में चर्चित है। दोनों सीकेसी स्कूल के छात्र थे। इनका कहना है कि कोई समस्या हो तो एक-दूसरे के लिए हमेशा हर काम छोड़कर भागते हैं। वहीं, बड़ा गांव गेट बाहर निवासी जिम एवं कैटरिंग का काम करने वाले नीतेश साहू और पुनीत अग्रवाल की दोस्ती भी 18 साल से चली आ रही। ये दोनों डिग्री कॉलेज में पढ़ाई के समय से साथ-साथ हैं।