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इस विजयादशमी संकल्प लें, बेटियों का नहीं होने देंगे चीरहरण, दु:शासनों को पहुंचाएंगे अंजाम तक

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झांसी। बुंदेलखंड में बेटियोें, महिलाओं पर अत्याचार के मामले बढ़ते जा रहे हैं। उनका जन्म लेने से लेकर घरों से निकला दूभर हो रहा है। लड़का होने की चाह में बड़ी संख्या में कन्या भ्रूण हत्या के मामले हो रहे हैं। बुंदेलखंड ही नहीं, झांसी-ललितपुर में प्रसव पूर्व लिंग जांच के रैकेट चल रहे हैं। जिनमें दूर-दूर से लोग आकर जांच करा रहे हैं। यही नहीं, जन्म लेने के बाद भी बेटियों की मुश्किलें भी कम नहीं हैं। कभी उन्हें बीच सड़क पर छेड़ा जाता है, कहीं वे घर और ऑफिस के अंदर असुरक्षित हैं। स्कूल-कॉलेज के अंदर और बाहर भी उनकी चुनौतियां कम नहीं हो रही हैं। आए दिन फब्तियां कसना, अश्लील हरकत, फोन, व्हाट्सएप पर भद्दे मेसेज, दुष्कर्म का भी शिकार होना पड़ रहा है। इस नवरात्र सभी को बेटियों को बचाने और उन्हें बढ़ाने और विजयादशमी पर बेटियों पर किसी भी रूप में अत्याचार करने वाले दु:शासनों को उनके अंजाम तक पहुंचाने का संकल्प लेना होगा।
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कन्या पूजते हैं, जन्म क्यों नहीं लेने देते
झांसी में प्रति 1000 लड़कों पर लड़कियों की औसत संख्या 890 है। पूरे बुंदेलखंड की बात करें तो ये आंकड़ा 848 के आस पास है। तमाम दावों के बावजूद यह समस्या बिगड़ती जा रही है। इसका प्रमुख कारण लड़के की चाह है। नवरात्र के दौरान घरों और मंदिरों में कन्या पूजने के बावजूद समाज का एक तबका अपने आंगन में बेटी को जन्म लेने देने का पक्षधर नहीं है। तमाम कानूनों के बावजूद झांसी, ललितपुर में भ्रूण के लिंग की जांच धड़ाधड़ हो रही है। पिछले वर्ष मध्य प्रदेश की महिला प्रशासनिक अधिकारियों ने स्टिंग के जरिए इसका खुलासा किया था। पर्याप्त सख्ती न होने के बावजूद अभी भी यह गोरखधंधा चल रहा है।
क्या बेटियां पढ़ाई छोड़ दें
11 अक्तूबर को एक नाबालिग छात्रा के साथ राजकीय पॉलिटेक्निक के छात्रों ने सामूहिक दुष्कर्म किया। दुस्साहस इस हद तक है कि दिनदहाड़े ये छात्र लड़की को सड़क से खींचकर हॉस्टल के अंदर ले गए। उसे मारा पीटा और दुष्कर्म का वीडियो बनाकर जबरन पैसे भी वसूले। बेटियों की रक्षा करने वाली पुलिस, पॉलिटेक्निक प्रशासन, सड़क से गुजरने वाला हर वो शख्स जिसने उसकी चीखें सुनकर अनसुना कर दिया गुनहगार है। सवाल उठता है कि क्या बेटियां घरों से निकलना छोड़ दें, पढ़ाई छोड़ दें या फिर अपने सहपाठियों से बात करना बंद कर दें।
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कब तक ये अत्याचार
- पिछले नौ महीने में झांसी में ही कुल 65 दुष्कर्म के मामले दर्ज हुए।
- इनमें 40 नाबालिग बेटियां दुष्कर्म का शिकार हुईं। 25 युवतियों और महिलाओं को भी यह दंश झेलना पड़ा।
- नौ महीनों में 111 मामले छेड़खानी के दर्ज हुए।
- हकीकत में छेड़छाड़ और दुष्कर्म के मामलों की संख्या अधिक होती है। सामाजिक लोकलाज के चलते कई प्रकरण पुलिस तक नहीं पहुंचते।
- बुंदेलखंड के गांवों में बेटियों के साथ यौन अपराध के मामले आए दिन होते रहते हैं।
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