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लें संकल्प, इस दशहरे पर कोरोना रूपी राक्षस का करना है खात्मा

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बड़ाबाजार की रामलीला में श्रीराम लक्ष्मण को सुग्रीव से मिलवाते हनुमान। अमर उजाला
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झांसी। होली के रंग फीके ही रह गए थे, चैत्र नवरात्र में भक्त देवी के दर्शन नहीं कर पाए थे। बहन - भाई के पवित्र रिश्ते के पर्व रक्षा बंधन में भी उल्लास नजर नहीं आया था और कृष्ण जन्माष्टमी पर भी बधाइयां नहीं गूंजीं थीं। ईद पर आपस में गले मिलकर मुबारकबाद नहीं दे पाए थे। अब शारदीय नवरात्र जारी हैं, देवी पीठों के पट श्रद्धालुुओं के लिए खुल तो गए हैं, परंतु भक्तों को तमाम पाबंदियों के बीच मां के दर्शन करने पड़ रहे हैं। सदियों पुरानी परंपराएं इस साल टूट गईं और ये हुआ है बेरहम और बहुरूपिया कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से। चार दिन बाद दशहरा है। ये पर्व है बुराई पर अच्छाई की जीत का। मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने अधर्मी रावण का वध किया था, लेकिन इस दशहरा पर हमें कोरोना के खात्मे का संकल्प लेना है। इस लड़ाई में जीत के लिए हमारे हथियार होंगे मास्क, सामाजिक दूरी और हमारी सतर्कता।
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साल 2020 की शुरुआत के साथ ही कोरोना वायरस के संक्रमण की आहट सुनाई देने लगी थी। मार्च में इस महामारी ने लोगों को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया था और ये क्रम लगातार अब भी जारी है। पूरे विश्व के लिए चुनौती बने इस साल में केवल लोगों की जिंदगियां ही नहीं गईं, बल्कि तमाम लोगों से उनका रोजगार और परिवार तक छीन लिया। बेरोजगार होने पर देश के महानगरों से लाखों मजदूरों को मजबूरी में अपने गांवों की ओर वापस लौटना पड़ा। लोगों को लॉकडाउन जैसी त्रासदी का सामना करना पड़ा। बावजूद, संक्रमण की रफ्तार नहीं थमी। लेकिन, अब वक्त आया गया है इस महामारी को जड़ से उखाड़ फेंकने का। इसके लिए लिए हमें राम की तरह महायुद्ध लड़ने की आवश्यकता नहीं है। बल्कि, छोटे - छोटे उपायों के जरिये हम कोरोना के राक्षस को मात दे सकते हैं। इस लड़ाई का हथियार हमें सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा। अनिवार्य रूप से मास्क का उपयोग करना होगा। स्वच्छता पर ध्यान देना होगा। मामूली से भी लक्षण महसूस होने पर हमें कोरोना की जांच करानी होगी। इन सब उपायों के जरिये हम कोरोना को आसानी से मात दे सकते हैं।
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जिले में कोरोना का कहर: एक नजर में...
- पहला मरीज 27 अप्रैल को मिला
- अब तक मिल चुके हैं 8174 मरीज
- 164 संक्रमितों की जा चुकी है जान
- वर्तमान में 383 लोग है संक्रमण से ग्रस्त
कोराना काल की त्रासदियां...
- कारोबार और उद्योग हुए बंद, हजारों लोग हुए बेरोजगार
- इलाज के अभाव में सैकड़ों लोगों की गई जान
- स्कूल बंद होने से बच्चों की पढ़ाई हुई प्रभावित
- पढ़े - लिखे नौजवानों के सामने आया नौकरी का संकट
- सरकारों के खजाने हुए खाली, विकास को लगा धक्का
- शादी-ब्याह जैसी रस्में भी निभा नहीं पाए लोग
- महीनों रहा हर ओर सन्नाटे और भय का माहौल
- रिश्ते-नाते तक बदले, अपनों ने अपनों से मुंह मोड़ा
- अर्थी को अपने कंधा तक नहीं दे सके, गैरों ने किया अंतिम संस्कार
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