झांसी। प्रकाश पर्व दीपावली नजदीक है। दीपावली पर लोग जमकर आतिशबाजी करते हैं। कोरोना काल में आतिशबाजी से यदि इस बार भी झांसी की आबोहवा बिगड़ गई तो सैकड़ों लोगों की सेहत पर असर पड़ सकता है। पिछले साल दिवाली पर 200 से ऊपर वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) पहुंचने के कारण झांसी की हवा खराब हो गई थी, जिससे श्वांस रोगियों को सांस लेने में काफी समस्या हुई थी।
इस साल 14 नवंबर को दीपावली का त्योहार है। हर बार दिवाली पर लोग फुलझड़ी, अनार, बम, पटाखे फोड़ते हैं। इससे वायु प्रदूषण फैलता है। आम तौर पर झांसी का एक्यूआई 100 के आसपास रहता है। मगर दीपावली पर यह दोगुने या उससे ज्यादा पहुंच जाता है। इससे लोगों को सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। खासकर बुजुर्ग, श्वांस रोगियों के लिए यह स्थिति ठीक नहीं होती है। इसके अलावा भी विभिन्न एलर्जी का शिकार लोग हो जाते हैं। मौजूदा समय में दीपावली पर्व कोरोना काल में पढ़ रहा है। ऐसे में लोगों के लिए यह समय बेहद खतरनाक है। इस बार वायु प्रदूषण बढ़ना शहरवासियों के लिए घातक साबित हो सकता है।
इन बीमारियों का रहता खतरा
मेडिकल कॉलेज के चेस्ट रोग विभागाध्यक्ष डॉ. मधुर्मय शास्त्री ने बताया कि बढ़े वायु प्रदूषण से लोगों को ब्रांकाइटिस होने का खतरा रहता है। इसमें श्वांस की नलियों में सूजन आने पर फेफड़े तक श्वांस पहुंचने में रुकावट आती है और सांस फूलने लगती है। अस्थमा, सीओपीडी से पीड़ित रोगियों को भी सांस लेने में बहुत तकलीफ होने लगती है, क्योंकि वायु प्रदूषण उत्प्रेरक का काम करता है। इसके अलावा नजला, जुकाम के रोगियों में भी इजाफा होता है। आंखों में खुजली, आंसू आना, लालिमा होना, छींके आना, खांसी बढ़ना आदि समस्याएं शुरू हो जाती हैं।
क्या है पीएम 2.5
वायुमंडलीय कण पदार्थ को संदर्भित करता है। इसमें 2.5 माइक्रोमीटर से कम व्यास होता है। जो मानव बाल के व्यास के लगभग तीन प्रतिशत हैं। आमतौर पर पीएम 2.5 के रूप में लिखा जाता है। इस श्रेणी में कण इतने छोटे होते हैं कि उन्हें सिर्फ इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप की मदद से ही पता लगाया जा सकता है।
एक्यूआई का मानक
0 से 50 तक अच्छा होता।
51 से 100 तक संतोषजनक।
101 से 200 तक चेतावनी।
201 से 300 बहुत खराब।
401 से 500 गंभीर।
500 से अधिक इमरजेंसी के हालात।
लखनऊ। प्रदेश सरकार ने वायु प्रदूषण के मद्देनजर झांसी, लखनऊ, रायबरेली सहित 16 जिलों के प्रमुख शहरों को संवेदनशील घोषित किया है। प्रमुख सचिव पर्यावरण सुधीर गर्ग ने इन जिलों के अधिकारियों को प्रदूषण नियंत्रण व शहरों की वायु गुणवत्ता बनाए रखने के लिए तत्काल कार्यवाही के निर्देश दिए हैं।
प्रमुख सचिव वन की अध्यक्षता में मंगलवार को यहां हुई राज्य स्तरीय एयर क्वालिटी मॉनीटरिंग कमेटी की बैठक में बताया गया कि वायु प्रदूषण के लिहाज से लखनऊ, रायबरेली, कानपुर, आगरा, गजरौला, गाजियाबाद, नोएडा, खुर्जा (बुलंदशहर), मेरठ, मुरादाबाद, अनपरा (सोनभद्र), प्रयागराज, वाराणसी, झांसी, फिरोजाबाद व बरेली संवेदनशील शहर के रूप में चिह्नित किए गए हैं। इन शहरों में वायु प्रदूषण के नियंत्रण के लिए पानी का नियमित छिड़काव, वाहनों की नियमित जांच, कूड़ा जलाने की घटनाओं पर नियंत्रण, निर्माण गतिविधियों में धूल नियंत्रण की व्यवस्था, पीटीजेड कैमरे की स्थापना, औद्योगिक इकाइयों के औचक निरीक्षण व हरित पट्टिका के विकास के निर्देश दिए गए।
इन शहरों के अधिकारियों ने प्रमुख सचिव के समक्ष वायु प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित कार्ययोजना के क्रियान्वयन की प्रगति का लेखाजोखा रखा। प्रमुख सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शहरों में चिह्नित हॉट स्पॉट में प्रभावी कार्यवाही करें। जिला प्रशासन नियमित रूप से प्रदूषण के स्तर का अनुश्रवण करें और तय कार्ययोजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित कराएं।