जनसूचना अधिकारियों के मंडलीय प्रशिक्षण शिविर के समापन पर राज्य सूचना आयुक्त गजेंद्र यादव ने कहा कि यदि कोई सूचना मांगता है तो उसे तीस दिन में उपलब्ध कराई जाए। आरटीआई के अंतर्गत आने वाले आवेदनों के निस्तारण में होने वाला खर्च कार्यालय मद से किया जाए।
विकास भवन सभागार में जालौन जिला के जनसूचना अधिकारियों और प्रथम अपीलीय अधिकारियों को उप्र सूचना का अधिकार नियमावली-2015 का प्रशिक्षण दिया गया। इसी के साथ तीन दिवसीय प्रशिक्षण का समापन हो गया। सूचना आयुक्त ने कहा कि यदि किसी जनसूचना के संबंध में डाक से आवेदन प्राप्त हो तो भी पावती देना जरूरी है। आरटीआई प्रारूप-3 आवेदन पत्र रजिस्टर में छेड़छाड़ करने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सूचना आयोग में सुनवाई के दौरान जनसूचना अधिकारी ही उपस्थित होकर अपना पक्ष रखें। यदि कोई जनसूचना अधिकारी किसी आवेदक को निर्धारित समय सीमा में जानकारी उपलब्ध नहीं कराता है अथवा जानबूझकर गलत अधूरी या भ्रामक सूचना देता है तो उस पर अर्थदंड लगाया जा सकता है। अर्थदंड की अधिकतम सीमा 25 हजार रुपये है। मंडलायुक्त के राममोहन राव ने सभी जनसूचना अधिकारियों एवं प्रथम अपीलीय अधिकारियों को सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत दिए गए सभी शसनादेशों, धाराओं, नियमों एवं शर्तों का अध्ययन करने के निर्देश दिए।
इस मौके पर जिलाधिकारी जालौन संदीप कौर, अपर आयुक्त सोबरन सिंह, मुख्य विकास अधिकारी नवनीत सिंह चहल, सूचना विभाग के सहायक निदेशक सुधीर कुमार उपस्थित रहे।