झांसी। चिलचिलाती गर्मी में पानी की समस्या लगातार गहराती जा रही है। शहर के 12 से अधिक मोहल्लों में लोगों को पीने का पानी नहीं मिल रहा। यहां पानी की मारामारी इस कदर है कि टैंकर पहुंचने के पांच मिनट के भीतर ही उसे खाली कर देेते है। पानी भरने से चूकने वालों को पूरा दिन बिना पानी के गुजराना पड़ता है।
लहरगिर्द, कसाई बाबा टोला, साकेतपुरम्, दयानंद कॉलोनी के आसपास, आईटीआई समेत दर्जनों मोहल्लों में अप्रैल माह से ही जल स्तर नीचे जाने लगता है। इन मोहल्लों में नलों से एक बूंद पानी नहीं टपकता। ऐसे में टैंकर ही इतनी बड़ी आबादी की प्यास बुझाते हैं लेकिन, इन टैंकराें के आने का कोई समय तय नहीं होता। लोग टैंकरों के इंतजार में पूरा दिन टकटकी लगाए बैठे रहते हैं। भारी भीड़ के चलते पानी भरने के लिए पूरे परिवार को जुटता पड़ता है, तब जाकर पीने का पानी मिलता है। लहरगिर्द मोहल्ले में करीब साढ़े बारह बजे एक टैंकर दाखिल होता है। उसके पहुंचते ही पूरे मोहल्ले में हल्ला मच जाता है और देखते-देखते पांच मिनट के भीतर पूरा टैंकर खाली हो जाता है। कई परिवार के लोगों को पानी नहीं मिल पाता। अब इनको अगले दिन ही पानी नसीब होगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि हजारों लोग पूरी गर्मी इसी तरह पानी का इंतजार करते हुए बिताते हैं।
- अप्रैल महीने से ही परेशानी शुरू हो जाती है। उसके बाद एक-एक बूंद पानी के लिए हम लोग परेशान होते हैं। शिवराम
- टैंकर के आने का कोई समय तय नहीं होता। उसके इंतजार में पूरा दिन खराब हो जाता है। फूलवती
- पानी के लिए बहुत परेशानी उठानी पड़ती है। पीने का पानी भी मुश्किल से मिलता है। गुड़िया
- टैंकर नियमित नहीं आता। कई बार फोन करने के बाद किसी एक टाइम आता है। पूरा दिन खराब हो जाता है। रवींद्र यादव
- पाइप लाइन से पानी नहीं मिलता। सिर्फ टैंकर के भरोसे पूरे दिन बैठे रहते हैं। इतनी बड़ी आबादी के लिए एक टैंकर भेजा जाता है। सुगर सिंह
- कपड़े भी नहीं धुल पाते। सिर्फ पीने का पानी ही मिलता है। किसी तरह काम चलना पड़ता है। निकिता
- गर्मियों में पानी की जरूरत ज्यादा होता है लेकिन, नल से एक बूंद पानी नहीं मिलता। टैंकर के बिना पानी मिलना मुश्किल है। लाला पटेल
- यहां टैंकर के सिवाय पानी की दूसरी वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। मोहल्ले में हैंडपंप भी लगा है लेकिन, वह भी खराब है। जयसिंह गौतम
- गर्मियों में किसी तरह से काम चल रहा है। लोगों की जरूरत अधिक होती है लेकिन, उतना पानी मिलता ही नहीं दिनेश
- टंकी बनाने पर ही यह समस्या खत्म हो सकती है लेकिन, आज तक इसे बनवाने की कोई कोशिश नहीं हुई। बृजभान