तीसरे दिन युवाओं पर केंद्रित रहा संघ का मंथन
झांसी। अखिल भारतीय योजक वर्ग के तीसरे दिन युवाओं को जोड़ने का खाका तैयार किया गया। इस लक्ष्य के लिए प्रांतीय टोलियों से विशेष कार्यक्रमों का आयोजन करने का आह्वान किया गया। साथ ही, सोशल मीडिया का भी सहारा लिया जाएगा।
योजक वर्ग के तीसरे दिन स्वयंसेवकों का युवाओं को जोड़ने जैसे विषयों पर मार्गदर्शन किया गया। एक सत्र में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि समाज में संघ का काम बढ़ा है। संघ के विस्तार में युवाओं की बड़ी भूमिका है। संघ के प्रकल्प ज्वाइन कर बड़ी संख्या में टेक्नोसेवी युवा संघ से जुड़ रहे हैं। साथ ही सर सह कार्यवाह सुरेश सोनी, डॉ. कृष्ण गोपाल, दत्तात्रेय होसबोले, डॉ. मनमोहन वैद्य, मुकुंदन ने अलग-अलग टोलियों की बैठक में कहा कि पिछले कुछ सालों में संघ से जुड़ने वाले 15 साल से ऊपर के युवाओं मे ं50 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई है। इसमें 20 से 35 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की संख्या सबसे अधिक है। पिछले कुछ वर्षों में राष्ट्रीय स्वयं स्वयंसेवक का काम, शाखाओं की संख्या और युवाओं के सहयोग में लगातार वृद्धि हुई है। संघ ग्राम विकास, कुटुम्ब प्रबोधन और सामाजिक समरसता जैसी गतिविधियां संचालित कर रहा है। परिवार समृद्ध होंगे तो राष्ट्र भी समर्थ बनेगा। कुटुम्ब प्रबोधन के पूरे देश में सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
मालूम हो कि अंबावाय स्थित एसआर इंजीनियरिंग कॉलेज में आयोजित अखिल भारतीय योजक वर्ग में देश भर से 240 योजक (शिक्षार्थी) शामिल होने आए हैं। इसके अलावा वर्ग में संघ के राष्ट्रीय, प्रांतीय व क्षेत्रीय पदाधिकारी मौजूद हैं।
गतिमान से दिल्ली जाएंगे संघ प्रमुख
राष्ट्रीय स्वयंसेवक का योजक वर्ग संघ प्रमुख की देखरेख में चल रहा है। वह 29 जून की रात राजधानी एक्सप्रेस से झांसी आए थे। पांच जुलाई को वर्ग खत्म हो जाएगा। छह जुलाई को राष्ट्रीय पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक के बाद वह गतिमान एक्सप्रेस से अपराह्न 3.05 बजे नई दिल्ली के लिए रवाना होंगे।
बुंदेली भोजन का लिया आनंद
देश भर से आए शिक्षार्थी स्वयंसेवकों ने बुधवार को योजक वर्ग के दोपहर के भोजन में बुंदेली व्यंजनों का आनंद लिया। इसमें उनको कड़ी, चावल, कचरी, मठ्ठा, एक सूखी सब्जी, आम, पापड़ु, मिर्ची परोसा गया।
मायूस होकर लौटे मंत्री
योजक वर्ग में मंगलवार को बुंदेलखंड के एक मंत्री बिना आमंत्रण के पहुंच गए। हालांकि, वह जिनके साथ गए थे, वह आमंत्रित पदाधिकारी थे। पहले तो मंत्री जी को गेट पर ही रोक लिया गया। मगर, पदाधिकारी के आग्रह करने पर उनको स्वागत कक्ष में बिठा दिया गया। पदाधिकारी के इंतजार में उनको स्वागत कक्ष में बैठकर ही वक्त बिताना पड़ा। बाद में वह मायूस होकर लौट आए।