संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। हंसारी पावर हाउस के पास चल रही श्रीराम कथा के छठवें दिवस पर कथाव्यास द्वारा भक्त प्रह्रलाद भक्ति, सत्यनिष्ठा एवं भगवान नारायण में अटूट विश्वास का प्रसंग सुनाया गया। जिसको सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए।
श्रीराम कथा में भक्त प्रह्रलाद की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि प्रह्रलाद राक्षसराज हिरण्यकश्यप के पुत्र होकर भी भगवान विष्णु के परम भक्त थे। हिरण्यकश्यप ने स्वयं को भगवान घोषित कर दिया और अपने पुत्र से भगवान विष्णु की भक्ति छोड़ने को कहा, लेकिन प्रह्रलाद ने अपने पिता की बात मानने से इन्कार कर दिया और हर संकट को स्वीकार किया। उन्होंने बताया कि उनकी भक्ति ने यह सिद्ध कर दिया कि भगवान से बड़ी कोई शक्ति नहीं होती। कहा कि आज के समाज में सत्यनिष्ठा के मार्ग पर चलना कठिन है, लेकिन प्रह्रलाद का जीवन यह सिखाता है कि सत्य के लिए लड़ाई लड़ना सबसे बड़ा धर्म है। इस अवसर पर नितेंद्र राय, पुष्पेंद्र राय, नरेंद्र कुमार राय, रमेश ग्वाल, महेंद्र, संतोष राय, कौशल राय, पूरन पाल, करन सिंह यादव, ज्ञान सिंह, भगवान दास राय, शिवशंकर राय, केदार राय, जयप्रकाश राय आदि उपस्थित रहे।