वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई की शादी की 175वीं वर्षगांठ 19 मई को इस बार फिर धूमधाम से मनाई जाएगी। महाराष्ट्र गणेश मंदिर कमेटी की ओर से इसकी तैयारियां शुरू कर दी गईं हैं। कमेटी की दूसरी बार होने जा रहे इस आयोजन को भव्य रूप देने की तैयारी है।
बैसाख शुक्ल दशमी संवत 1899 (19 मई 1842) को बिठूर की कन्या मनु झांसी की रानी बनी थी। इसी दिन रानी लक्ष्मीबाई का विवाह झांसी के राजा गंगाधर राव के साथ हुआ था। वैवाहिक कार्यक्रम शहर में पानी वाली धर्मशाला के निकट स्थित प्राचीन गणेश मंदिर में आयोजित किए गए थे। यह महत्वपूर्ण तारीख इतिहास के पन्नों में गुम हो गई थी। रानी के विवाह की तिथि की जानकारी उनकी शादी के निमंत्रण पत्र से हुई। यह पत्रिका गंगाधर राव के पिता सदाशिव नारायण की ओर से दतिया नरेश को भेजी गई थी। पिछले साल इतिहास के इस महत्वपूर्ण दस्तावेज के सामने आने पर रानी की शादी की 174वीं वर्षगांठ आयोजित की गई थी। पहली बार हुए इस आयोजन में शहर के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। महाराष्ट्र गणेश मंदिर कमेटी की इस बार और भी भव्य आयोजन की तैयारी है।
धूमधाम से निकलेगी राजा की बारात
19 मई को लक्ष्मी व्यायाम मंदिर से धूमधाम से राजा गंगाधर राव की बारात निकाली गई जाएगी, जो नगर भ्रमण के बाद गणेश मंदिर पहुंचेगी। यहां प्रतीकात्मक रूप से अन्य वैवाहिक रस्में पूरी की जाएंगी। रात में संस्था राष्ट्रीय संगीत परिवार की ओर से गीत-संगीत का कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाएगा। जबकि, इससे एक दिन पहले 18 मई को रानी की जीवन गाथा पर आधारित चित्रकला प्रतियोगिता होगी और शाम को महिलाओं को मेहंदी लगाई जाएगी।
कल बनेगी आयोजन की रूपरेखा
महाराष्ट्र गणेश मंदिर कमेटी की बुधवार को शाम साढ़े पांच बजे गणेश मंदिर में बैठक होगी, जिसमें व्यापारिक, सामाजिक संगठन और जन सामान्य के लोगों को आमंत्रित किया गया है। बैठक में आयोजन का विस्तृत खाका तैयार किया जाएगा। साथ ही लोगों को आयोजन से जुड़ी जिम्मेदारियां भी सौंपी जाएंगी। कमेटी के सचिव गजानन खानवलकर ने बताया कि बैठक में कोई भी शामिल हो सकता है।