झांसी। 40 साल का युवक थायरॉइड की चपेट में आ गया। लंबे समय तक उसे बीमारी के बारे में पता ही नहीं चला। उसका वजन लगातार घटता जा रहा था। मेडिकल कॉलेज में जांच के बाद वह हाइपर थायरॉइड का मरीज निकला। उसका वजन 60 किलो से घटकर 35 किलो यानी किशोर के बराबर पहुंच गया था। वहीं, हाइपो थायरॉइड के रोगियों के वजन में बहुत इजाफा हुआ। ऐसे तमाम केस डॉक्टरों के पास रोजाना पहुंच रहे हैं।
थायरॉइड ऐसी बीमारी है, जिसके लक्षण समझने में समय लग जाता है। इस वजह से बीमारी बढ़ती जाती है। मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. रामबाबू ने बताया कि थायरॉइड के इलाज में लापरवाही बरतने से ये रोग खतरनाक हो सकता है। उन्होंने कहा कि मुख्यता थायरॉइड दो प्रकार की होती हैं, हाइपो और हाइपर थायरॉइडिज्म। हाइपो थायरॉइड में मरीज का वजन बढ़ता जाता है और हाइपर में घटता रहता है। बताया कि मेडिकल कॉलेज में हर महीने 500 से भी ज्यादा थायरॉइड के रोगी इलाज कराने के लिए आते हैं। उन्होंने बताया कि एक मरीज उनके पास ऐसा आया जो 40 साल का था मगर उसका वजन 14-15 साल के किशोर के बराबर पहुंच गया। वहीं, हाइपो थायरॉइड का शिकार 70 किलो के व्यक्ति का वजन बढ़कर 105 किलो तक पहुंच गया। उन्होंने बताया कि दवाओं से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है। वहीं, फिजीशियन डॉ. राजीव जैन ने बताया कि यदि गर्भवती महिलाओं का हाइपो थायरॉइडिज्म का इलाज समय पर नहीं हुआ तो जन्म लेने वाला बच्चा मंद बुद्धि पैदा हो सकता है। इस बीमारी में गर्भवती महिलाओं का गर्भ गिरने की भी आशंका रहती है।
ये भी जानें
- 90 प्रतिशत रोगियों को हाइपो थायरॉइडिज्म होती।
- कुल आबादी की 4 फीसदी लोगों को थायरॉइड होती।
- 6-7 प्रतिशत महिलाएं इस बीमार का शिकार होती हैं।
- 3-4 फीसदी पुरुषों, इतने ही बच्चों को थायरॉइड होती।
हाइपो थाइयरॉइड के लक्षण
- वजन बढ़ना
- मानसिक तनाव
- बालों का झड़ना
- हाथ-पैर में सूजन
- थकान, सुस्ती होना
हाइपर थाइयरॉइड के लक्षण
- वजन कम होना
- दिल की धड़कन तेज होना
- कम नींद आना
- घबराहट होना
- अधिक प्यास लगना