महानगर में एक ही स्थान पर बिजली, पानी और हाउस टैक्स के भुगतान की सुविधा मिले, इसके लिए नगर निगम ने नीति आयोग के समक्ष प्रजेंटेशन कर दिया है। रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय भेज दी गई है। अब वहां से हरी झंडी का इंतजार किया जा रहा है। यदि सिंगल विंडो सिस्टम (एसवीएस) लागू हो गया तो महानगरवासियों को अलग-अलग कार्यालयों में नहीं भटकना पड़ेगा, बल्कि एक ही स्थान पर उन्हें सभी सुविधाएं मिल जाएंगी।
पानी की बूंद - बूंद कैसे उपयोग की जाती है, इसका सिंगापुर में अध्ययन करने के बाद नगर आयुक्त अरुण प्रकाश ने नीति आयोग के समक्ष 16 से 20 दिसंबर तक नई दिल्ली में पावर प्रजेंटेशन दिया था। इसमें मुख्य रूप से यह बताया गया कि महानगर में बिजली, पानी, हाउस टैक्स, टेलीफोन बिल अलग- अलग विभागों में जाकर जमा किए जाते हैं तथा इन कार्यालयों से संबंधित दिक्कतों को दूर करने के लिए लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक आने- जाने में परेशानी होती है तथा इसमें बहुत समय खर्च होता है, क्योंकि ज्यादातर कार्यालय महानगर में अलग- अलग छोर पर होते हैं। यदि महानगरों में इन कार्यालयों को एक ही स्थान पर (नगर निगम कैंपस) शिफ्ट कर दिया जाए, तो लोगों को आसानी होगी और समय की बचत होगी।
झांसी के लक्ष्मीताल का प्रजेंटेशन दिया गया, जिसमें बताया गया कि छह ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाएंगे, इसके लिए बड़ागांव गेट बाहर मानव ताल और पहूंज नदी पर प्लांट लगाया जाएगा। सालिड वेस्ट मैनेजमेंट सौ प्रतिशत किया जाएगा, अभी शहर में 70 प्रतिशत कचरा का कलेक्शन हो रहा है, लेकिन जल्द ही सौ प्रतिशत कर लिया जाएगा। इसमें वेस्ट आफ इनर्जी पर ध्यान दिया जाएगा तथा सूखा और गीला कचरा जो अभी अलग- अलग नहीं हो पा रहा है, उसे अलग- अलग किया जाएगा। इन कामों से पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप को जोड़ा जाएगा।
प्रजेंटेशन पूरा हो गया
नई दिल्ली में नीति आयोग के समक्ष प्रजेंटेशन हो गया है। चार दिन तक चली मीटिंग में इसका मॉडल तैयार कर इसे प्रधानमंत्री कार्यालय भेज दिया गया। अब जो भी निर्णय होगा, उसी हिसाब से अगला कदम उठाया जाएगा।
- अरुण प्रकाश
नगर आयुक्त