सितंबर का महीना समाप्त होने के साथ ही मानसून का सीजन भी समाप्त हो गया। लगातार दो साल से सूखे की विभीषका झेल रहे बुंदेलखंड में इस बार पिछले साल से थोड़ी सी ज्यादा बरसात होने से थोड़ी राहत मिली है। झांसी जनपद समेत सभी जिलों के बांधों में लबालब पानी भर गया है।
लगातार दो साल पड़े सूखे से बुंदेलखंड में हाहाकार मचा हुआ था। हैंडपंपों के हलक सूख गए थे। तालाब खाली मैदान बन गए थे। बांधों में भी पानी बहुत कम हो गया था। मानसून आने पर हुई झमाझम बारिश ने बुंदेलखंड को भले ही कुछ समय के लिए सही सूखे की त्रासदी से मुक्त किया। इस बार जून के महीने में ही मानसून सक्रिय हो गया था। हालांकि, औसत 276.20 मिमी से बहुत कम 34.06 मिमी बरसात हुई। जुलाई में झांसी जिले में 282.10 मिमी पानी बरसने का औसत है, लेकिन अबकी बार 309.22 मिमी पानी बरसा।
जिससे सूखे से जूझ रहे जिलावासियों को राहत मिल गई। अच्छे मानसून की उम्मीद से किसानों के चेहरे खिल गए। पानी बरसने का सिलसिला अगस्त में भी जारी रहा और 225.85 मिमी बरसात हुई। उम्मीद थी कि सितंबर माह में भी इसी तरह से बरसात होगी, लेकिन सितंबर के महीने में एकदम से ब्रेक लग गया और बरसात थम गई।
पूरे महीने में औसत वर्षा 276.20 मिमी होनी चाहिए थे, जबकि सिर्फ 10.20 मिमी ही बरसात हो पाई और मानसून सीजन समाप्त हो गया। इस तरह जिले में कुल मिलाकर 569.13 मिमी बरसात हुई, जबकि जिले में पूर्व वर्षों में औसत वर्षा का मानक 842.20 मिमी मानी जाती है। हालांकि मानक औसत वर्षा हाल की वर्षों में 2013 में ही हुई थी। इसके बाद के वर्षों में बराबर सूखे की स्थिति बनी रही है।
भले ही इस बार उम्मीद से कम बरसात हुई हो, लेकिन बांधों में लबालब पानी होने के कारण इस साल लोगों को ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। इस बार बरसात की खास बात यह रही कि तेज पानी बरसा, लेकिन पानी बरसने के बाद मौसम साफ हो गया। इस कारण खरीफ फसल की अच्छी पैदावार हुई। इससे किसानों को बड़ी राहत मिली है।
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तीन साल में हुई बरसात
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2014 415.97 मिमी
2015 500.30 मिमी
2016 569.13 मिमी
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बांधों का जलस्तर
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बांध कुल क्षमता पानी
ढुकुवां 273.71 मीटर 272.34 मीटर
पारीछा 194.65 मीटर 192.89 मीटर
डोंगरी 272.20 मीटर 272.20 मीटर
पहूंज 234.09 मीटर 234.00 मीटर
खपरार 273.30 मीटर 272.30 मीटर
सपरार 224.64 मीटर 223.90 मीटर
पहाड़ी 195.93 मीटर 195.31 मीटर
पथरई 199.80 मीटर 203 मीटर
बढ़वार 186.65 मीटर 184.87 मीटर
सितंबर में बरसात नहीं होने से खेतों की नमी खत्म हो गई है, इसलिए अब रबी फसलों की बुवाई पलेवा करके ही करनी पड़ेगी। यदि किसान अभी बुवाई कर रहे हों, तो वह तापमान कम होने का इंतजार करें। यदि खेतों में बीज डालेंगे तो तापमान की अधिकता से कुछ भी पैदा नहीं होगा।
- डा. बीआर मौर्य
जिला कृषि अधिकारी