कोरोनाकाल में पैरोल पर छोड़े गए बंदियों के वापस न लौटने पर पुलिस एफआईआर दर्ज करेगी। सभी की समय सीमा पूरी होने के बाद भी अब तक 39 बंदी जेल नहीं लौटे हैं। ऐसे सभी बंदियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की चार टीमें भी गठित की गई हैं।
कोरोना संक्रमण के चलते जिला कारागार से 46 बंदी पैरोल पर छोड़े गए थे। शुरुआत में इनको आठ सप्ताह की पैरोल पर रिहा किया गया, जो बाद में चार बार बढ़ाई गई। यह अवधि पिछले माह पूरी हो गई थी। इसके बाद अवधि नहीं बढ़ाई गई। पैरोल का समय पूरा होने पर बंदियों को वापस लौटना था। इनमें सात बंदी तो वापस लौट आए हैं, लेकिन 39 बंदी अब भी लापता हैं। बंदियों के वापस न लौटने पर जेल प्रशासन ने इनकी गिरफ्तारी के लिए एसएसपी को पत्र लिखा है। जिसके बाद हरकत में आई पुलिस की टीमें तलाश में जुट गई हैं।
एसएसपी ने बंदियों को पकड़ने के लिए पुलिस की चार टीमें भी गठित कर दी हैं। इनमें अधिकांश बंदी बाहरी जिले की हैं। इन सभी को पकड़ने के लिए जिलों के पुलिस अधिकारियों को पत्र लिखा है। इनकी सूची नाम-पते के साथ भेज दी है ताकि संबंधित थानों की पुलिस के जरिए इनकी गिरफ्तारी कराई जा सके।
वापस आकर अतिरिक्त काटनी होगी पैरोल की अवधि
बंदियों को जेल में पैरोल की अवधि भी बितानी होगी। पैरोल पर रिहा किए ऐसे बंदी, जिनको सजा सुनाई जा चुकी है उन्हें जेल वापस लौटने के बाद अपनी सजा के अलावा इतने ही अतिरिक्त दिन जेल में बिताने होंगे।
दो बंदी गिरफ्तार कर भेजे जेल
पैरोल पर छोड़े गए बंदियों को पकड़ने के लिए थानों की पुलिस को निर्देश दिए गए हैं। शुक्रवार को अभियान के दौरान कोतवाली पुलिस ने अंदर उन्नाव गेट निवासी किशनलाल सोनी व इतवारी गंज निवासी बबलू राइन को गिरफ्तार कर जेल भेजा है।