अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। प्राचार्य के फैसलों से मेडिकल कॉलेज का माहौल गर्माया है। जैसे ही फैसले गले की फांस बनते हैं, वैसे ही यू-टर्न ले लिया जाता है।
शुक्रवार सुबह प्राचार्य शिव कुमार ने आरडीए के धरना-प्रदर्शन के एलान के बाद शनिवार से ओपीडी का समय पूर्ववत कर दिया। इससे पूर्व प्राचार्य ने एंटी रैगिंग कमेटी के फैसले को कटघरे में खड़ा कर रिव्यू कमेटी गठित करने का आदेश दिया था। कुछ समय बाद मामला कानूनी पेंच में फंसने लगा तो यू-टर्न ले लिया। अक्तूबर 2023 में एमबीबीएस-2021 बैच के छात्रों ने जूनियर छात्रों की रैगिंग लेते हुए गाली-गलौज, अभद्रता व मारपीट की थी। तत्कालीन प्राचार्य डॉ. एनएस सेंगर की अध्यक्षता में गठित एंटी रैगिंग कमेटी ने आरोप की पुष्टि होने पर 25 छात्र को दोषी ठहराया था। पांच छात्रों को एक-एक माह के लिए निष्कासित कर दिया था। सभी 25 छात्रों पर 25-25 हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया था।
वहीं, प्राचार्य ने पैरामेडिकल ट्रेनिंग कॉलेज की लैब में स्थापित उपकरण उखाड़कर पुन: स्टोर में जमा करने के बाद ही भुगतान का आदेश दिया। इसको लेकर पैरामेडिकल और मेडिकल कॉलेज प्राचार्य के बीच जमकर खींचतान हुई। जब मामला लखनऊ पहुंचा तो प्राचार्य बैकफुट पर आ गए। इसके बाद तीन सदस्यीय कमेटी (उप-प्राचार्य डॉ. मयंक सिंह, सीएमएस डॉ. सचिन माहुर व कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. कुलदीप चंदेल) गठित कर भौतिक सत्यापन के लिए पैरामेडिकल कॉलेज भेजी।