फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jhansi News: चार जून को होगा उम्मीदवारों के राजनीतिक भविष्य का फैसला

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

झांसी। झांसी-ललितपुर संसदीय क्षेत्र से किस्मत आजमा रहे दस उम्मीदवारों के राजनीतिक भविष्य का फैसला चार जून को होगा। भोजला मंडी में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतगणना होगी। निर्वाचन आयोग के निर्देश पर मतगणना की तैयारियां पहले से ही जारी हैं।
इस लोकसभा चुनाव में झांसी-ललितपुर सीट से 10 प्रत्याशी भाजपा से अनुराग शर्मा, कांग्रेस के प्रदीप जैन आदित्य, बसपा के रवि प्रकाश समेत अपना दल (कमेरावादी) के चंदन सिंह, अल हिंद पार्टी के इं. दीपक कुमार वर्मा, निर्दलीय इंद्र सिंह, गनेशराम, धर्मेंद्र प्रताप, रमेश व लखन लाल मैदान में हैं। सोमवार को जनता ने इन सभी प्रत्याशियों के राजनीतिक भविष्य की इबारत मतदान के जरिये लिख दी। चार जून को वोटों की गिनती के साथ यह तय हो जाएगा कि जनता ने किसका दिया साथ और किसे किया निराश। मतगणना भोजला मंडी में सुबह सात बजे शुरू होगी।
विज्ञापन

00000000

मोबाइल रखने के लिए परेशान होते रहे लोग
झांसी। मतदान की गोपनीयता भंग न हो, इसके लिए निर्वाचन आयोग की ओर से बूथ के अंदर मोबाइल फोन ले जाना प्रतिबंधित कर दिया था। बावजूद, तमाम लोग मतदान केंद्रों पर मोबाइल फोन लेकर पहुंच गए, वहां जाकर उन्हें जानकारी हुई कि वह बूथ के अंदर मोबाइल फोन नहीं ले जा सकते हैं। ऐसे में जो मतदाता अकेले वोट डालने पहुंचे थे, वे अपना मोबाइल बूथ के बाहर छोड़ने के लिए परेशान होते देखे गए। किसी ने केंद्र पर तैनात सुरक्षा कर्मियों को मोबाइल थमाया तो कोई पर्ची बना रहे राजनीतिक दलों के एजेंटों के पास मोबाइल छोड़कर वोट डालने पहुंचा। ब्यूरो
000000000
सूची में नाम न होने पर व्यवस्थाओं को कोसा
झांसी। सूची में नाम न होने पर तमाम मतदाताओं को बगैर वोट डाले वापस लौटना पड़ा। कमोबेश यह नजारा सभी मतदान केंद्रों पर देखने को मिला। ऐसे में मतदाता व्यवस्थाओं को कोसते नजर आए। उनमें से ज्यादातर का कहना था कि उन्होंने पिछले निकाय और विधानसभा चुनाव में वोट डाला था, परंतु अब उनका नाम लिस्ट गायब हो गया है। ब्यूरो
विज्ञापन

000000000
मौन रहे मतदाता, खुलकर बोलने से बचे
झांसी। राजनीतिक दलों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मतदान की समाप्ति तक एक-एक वोट को अपने पाले में लाने की कोशिश में जुटे रहे, लेकिन मतदाता चुप्पी साधे रहे। वोट डालने से पहले और बाद में भी वे मतदान की गोपनीयता भंग करने से बचते रहे। खासतौर पर महिला मतदाताओं का रुझान राजनीतिक दलों की समझ से परे रहा। ब्यूरो
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें