अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। जिला पंचायत अध्यक्ष पवन कुमार गौतम और 24 सदस्यों का कार्यकाल आज समाप्त हो गया है। सरकार ने ग्राम प्रधानों की तर्ज पर जिला पंचायत अध्यक्ष को ही प्रशासक नियुक्त कर दिया है, हालांकि अब उनकी शक्तियां पहले जैसी नहीं रहेंगी। शासन द्वारा जारी नई गाइडलाइन के तहत अब किसी भी नए विकास कार्य या नीतिगत फैसले के लिए जिलाधिकारी की अनुमति अनिवार्य होगी।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव वर्ष 2021 में हुआ था। चुनाव के बाद 12 जुलाई को जिला पंचायत अध्यक्ष और सदस्यों ने शपथ ग्रहण की थी। जिसके बाद से जिला पंचायत अध्यक्ष लगातार ग्रामीण इलाकों में विकास कार्य कराते चले आ रहे हैं। पांच वर्षीय कार्यकाल को उपलब्धियों से भरा बताते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में संपर्क मार्गों का निर्माण, सीसी व इंटरलाकिंग सड़कें, नालियां, जल संरक्षण, स्कूलों का विकास, महिला सुविधाओं का विस्तार, एलईडी व हाईमास्ट लाइटें और कार्यालय का सुंदरीकरण जैसे अनेक कार्य कराए गए है। ग्रामीण क्षेत्रों में आवासीय एवं व्यावसायिक भवनों के नक्शा स्वीकृति की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी गई। आठ ग्राम पंचायतों में अमृत सरोवर विकसित किए गए। शासन से आए आदेश के तहत 12 जुलाई से अध्यक्ष प्रशासक के रूप में काम करेंगे। वह केवल सामान्य रूटीन कार्य ही कर सकेंगे। कोई नीतिगत फैसला नहीं ले सकेंगे। अगर कोई जरूरी नीति संबंधी फैसला लेना हो तो जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को प्रस्ताव भेजना होगा। यह व्यवस्था चुनाव के बाद नई पंचायत बनने या 6 महीने पूरे होने, जो भी पहले हो, तक चलेगी। इधर पिछड़ा वर्ग आयोग के द्वारा रिपोर्ट मांगने को लेकर चर्चा भी तेजी हो रही है। क्षेत्र पंचायत प्रमुख व सदस्यों का कार्यकाल भी 19 जुलाई को पूरा होना है। इसको लेकर भी ब्लाकों में हलचल मची हुई है।
वर्जन
कार्यकाल समाप्त हो गया है। मगर शासन ने प्रशासक के रूप में तैनाती का आदेश जारी कर दिया है। इससे विकास कार्य पर कोई रुकावट नहीं होगी। विकास पहले के जैसा होता रहेगा।
पवन कुमार गौतम, जिला पंचायत अध्यक्ष