फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jhansi News: जिसे दफनाने के लिए खोद दी थी कब्र, 12 दिन बाद वह जिंदा लौटी

Mon, 17 Aug 2026 02:26 AM IST
झांसी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
विज्ञापन
विज्ञापन
झांसी। बड़ागांव के हरदौलपुरा मोहल्ले में दो अगस्त को सांप के डसने से छह वर्षीय मयंक की मौत हो गई, जबकि उसकी चार वर्षीय बहन प्रगति की हालत इतनी गंभीर हो गई थी कि परिजनों ने उसकी भी मौत मान ली थी। मयंक के साथ प्रगति को दफनाने के लिए एक दूसरी कब्र भी खोद दी गई थी। इसी बीच डॉक्टरों की मेहनत और इलाज से प्रगति की सांसें लौटने लगीं। करीब 12 दिन तक अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ने के बाद 14 अगस्त को वह स्वस्थ होकर घर पहुंची। बेटी को सीने से लगाकर मां नेहा कुशवाहा की आंखों से आंसू छलक उठे। उन्होंने कहा, मैंने अपना इकलौता बेटा खो दिया, लेकिन मेरी इकलौती बेटी को दूसरा जीवन मिल गया।
विज्ञापन


परिजनों के मुताबिक घटना से करीब तीन दिन पहले प्रदीप कुशवाहा के घर के उसी कमरे में सांपों का जोड़ा निकला था। परिवार वालों ने एक सांप को मार दिया, जबकि दूसरा नहीं मिला। दो अगस्त की तड़के करीब तीन बजे प्रदीप के ड्यूटी पर जाने के बाद नेहा दोनों बच्चों को कमरे में छोड़कर बाहर काम कर रही थीं, तभी कमरे में निकले सांप ने पहले प्रगति को डसा। बच्ची रोने लगी तो नेहा उसे दादी के पास छोड़कर वापस बेटे मयंक के पास आ गईं। कुछ देर बाद मयंक भी चीख पड़ा। पास जाकर देखा तो सांप ने उसे तीन जगह डस लिया था। दोनों बच्चों को अस्पताल ले जाया गया। इलाज के दौरान मयंक की मौत हो गई, जबकि प्रगति की हालत लगातार बिगड़ती गई। सर्पदंश के बाद प्रगति के मुंह से झाग निकलने लगा था। उसके हाथ-पैर में हरकत नहीं थी। वह आंखें तक नहीं खोल पा रही थी। हालत देखकर परिजनों को लगा कि उसे भी नहीं बचाया जा सकेगा। गांव में मयंक के साथ प्रगति के अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू कर दी गई। मां-बाप उसे लेकर गांव लौट गए। विधायक राजीव पारीछा के दखल के बाद अचेत हाल में बेटी को लेकर डा. शुभदीप ऋषि के यहां पहुंचे। बच्ची की हालत बेहद नाजुक होने पर उसे वेंटिलेटर पर रखा गया। करीब 72 घंटे तक वह अचेत रही। 6 अगस्त को उसकी बेहोशी टूटने पर डॉक्टरों को उम्मीद जगी। इसके बाद धीरे-धीरे उसे तरल आहार दिया गया। जहर का असर कम होने के साथ उसकी चेतना और शारीरिक गतिविधियां भी लौटने लगीं।
000
12 दिन बाद बेटी को लेकर घर पहुंची मां
लगातार इलाज के बाद प्रगति की हालत में सुधार हुआ और 14 अगस्त को उसे अस्पताल से छुट्टी मिल गई। घर पहुंचते ही मां ने उसे सीने से लगा लिया। परिवार में बेटे को खोने का गम है, लेकिन बेटी के बच जाने की राहत भी है। परिजनों का कहना है कि जिस बच्ची को कुछ दिन पहले मृत मानकर उसकी कब्र खोद दी गई थी, उसी को अब वे अपने बीच देख रहे हैं। चिकित्सकों ने भी लगातार उपचार के जरिए उसे बचाने में अहम भूमिका निभाई।
विज्ञापन


000
सांप के बदला लेने की धारणा गलत जोड़े सांप में एक को मार देने के बाद दूसरे सांप के बच्चों को डसने के बाद से पूरे इलाके में इसे सांप के बदला लिए जाने की बात फैलने लगी लेकिन, जंतु विशेषज्ञों समेत चिकित्सकों ने भी इससे इन्कार किया है। जंतु विशेषज्ञ डा. कौशल किशोर के मुताबिक सांप के बदला लेने की धारणा वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है। एक सांप को मारने के बाद दूसरा बदला लेने नहीं आता। ऐसे मामलों में सबसे जरूरी है कि सर्पदंश के बाद मरीज को बिना समय गंवाए ऐसे अस्पताल पहुंचाया जाए, जहां एंटी स्नेक वेनम और आवश्यक उपचार उपलब्ध हो।

000
हमारे लिए शुरुआती 72 घंटे बेहद नाजुक रहे। बच्ची को गहन निगरानी में रखा गया था। मामूली सुधार होने के बाद हम लोगों को उम्मीद बंध गई थी। बच्ची की जान बचने से सभी लोग खुश हैं।
विज्ञापन

डाॅ. शुभदीप ऋषि
वरिष्ठ चिकित्सक
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें