नकली सिगरेट बनाने वाली कंपनी का भंडाफोड़
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झांसी। आईटीसी कंपनी के नई दिल्ली से आए मैनेजर ऋषि मिश्रा की सूचना पर देर-रात पुलिस टीम कार्रवाई करने पहुंची थी। गोदाम और फैक्टरी के भीतर इतना माल भरा हुआ था कि सोमवार तड़के करीब पांच बजे तक कार्रवाई चलती रही। गोदाम और फैक्टरी में बड़े पैमाने पर सिगरेट के डिब्बी एवं उसे बनाने में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल भरा हुआ था। गोदाम की छत तक इसका ढेर लगा था। यह देखकर पुलिस अधिकारी भी हैरत में रह गए। जिस बड़े पैमाने पर यह यहां फैक्टरी संचालित की जा रही थी, पुलिस को इसके पीछे किसी बड़े नेटवर्क के होने की आशंका है।
प्रारंभिक छानबीन में मालूम चला कि पिछले करीब तीन महीने से करोड़ों रुपये की नकली सिगरेट लोकल एवं बाहरी मार्केट में खपाई जा रही थी। पुलिस को आशंका है कि इस कारोबार से जुड़े लोग भी इसमें शामिल हैं। सिगरेट एवं तंबाकू उत्पाद से जुड़ी कंपनियां मोटी रकम लेकर स्थानीय स्तर पर अपने वितरक बनाती हैं। वितरक आपूर्ति एवं वितरण पर कड़ी निगाह रखता है। इसके बावजूद करोड़ों रुपये की नकली सिगरेट खपाई जा रही थी। छानबीन में पुलिस को इसका भी सुराग मिला कि यहां नकली सिगरेट तैयार होने के बाद गुपचुप तरीके से इसे दिल्ली, कानपुर समेत मध्य प्रदेश के कई इलाकों में खपाया जाता था। हालांकि, इसको वहां भेजे जाने की व्यवस्था का पता अभी नहीं चल सका है। पुलिस इसका भी पता लगाने में जुटी है।
पूछताछ के दौरान आरोपी श्रीनिवास ने भी कई अहम राज पुलिस के सामने उगले। उसने बताया कि नकली सिगरेट खपाने के लिए ही उसने दो ब्रांड भी रजिर्स्टड कराए थे, जिससे किसी को शक न हो। उसके मोबाइल फोन में थोक ऑर्डर से जुड़ी कई चैट भी पुलिस को मिली है। पुलिस अब इसके सहारे यह पता लगाने में जुटी है कि पिछले तीन महीने से उसने नकली सिगरेट कहां-कहां खपाई। पुलिस उसके मोबाइल फोन का सीडीआर भी खंगाल रही है। एसएसपी विकास कुमार के मुताबिक हर पहलुओं को खंगाला जा रहा है। पुलिस इन सब बातों का पता लगाने में जुटी है।
बीस से अधिक मजदूर करते थे काम
महाराणा प्रताप नगर मोहल्ले के आसपास के लोगों ने बताया कि यहां रोजाना करीब बीस से अधिक मजदूर काम करने आते थे। मजदूर फैक्टरी के अंदर काम करते थे। काम खत्म करने निकल जाते थे। मोहल्ले के लोगों को भी नहीं पता था कि यहां सिगरेट बनाने का काम होता है। पुलिस के पहुंचने के बाद मोहल्ले के लोगों में खलबली मची। इसके बाद उनको भी इसका पता लगा। पुलिस के पहुंचने पर यहां सात मजदूर काम करते मिले हालांकि पुलिस ने इन सभी को पूछताछ के बाद छोड़ दिया।