नगर निकाय चुनाव में अबकी बार महापौर पद किसके खाते में जाएगा, इसको लेकर जिज्ञासा बढ़ गई है। हाल ही में कराए गए अन्य पिछड़ा वर्ग के रैपिड सर्वे में पिछड़ा वर्ग के लोगों की संख्या 1,65,167 है, जो कुल आबादी के 32.6 प्रतिशत हैं। अब इस सर्वे पर आपत्तियां मांगी जा रही हैं।
नगर पंचायत, नगर पालिका व नगर निगम में मई के अंतिम सप्ताह में चुनाव का बिगुल बज सकता है। वार्डों का परिसीमन हो गया है। इस पर आईं आपत्तियां निस्तारित कर शासन को वार्डों की सूची भेज दी गई है। अब वार्डों के आरक्षण को लेकर जिज्ञासा बढ़ गई है। हर कोई जानना चाहता है कि उनका वार्ड आरक्षित है या नहीं। प्रमुख सचिव कुमार कमलेश ने अनुसूचित जातियों की अधिकता वाले वार्डों को घटते हुए क्रम में रखने के निर्देश दिए थे। माना जा रहा है कि इसी आधार पर वार्डों का आरक्षण भी तय होगा। महानगर की आबादी 5,05,693 है और कुल मतदाता 3,73,268 हैं। अन्य पिछड़ा वर्ग कर आबादी 1,65,167 है और कुल आबादी का 32.6 प्रतिशत हैं।
27 प्रतिशत आरक्षण अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए, 22.5 प्रतिशत आरक्षण अनुसूचित जाति और जन जाति के लिए तथा 52.5 प्रतिशत सामान्य वर्ग के लिए हैं। झांसी में 60 वार्ड हैं। आरक्षण के हिसाब से देखें तो 27 प्रतिशत सीटें अन्य पिछड़ा वर्ग की रहेंगी। इसका तीस प्रतिशत महिलाओं के लिए आरक्षण होगा। इसी तरह अनुसूचित जाति के लिए 22.5 प्रतिशत आरक्षण होगा और इसमें से 30 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। सामान्य वर्ग के लिए 52.5 प्रतिशत सीटों में से 30 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगी।
इस तरह साठ वार्डों में से 14 वार्ड अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित रहेंगे, 16 वार्ड अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए और शेष 30 वार्ड अनारक्षित रहेंगे। लेकिन, इसमें से महिलाओं के लिए सामान्य वर्ग की 16 सीटें, अनुसूचित जाति/ जनजाति की महिलाओं के लिए 07 सीटें और अन्य पिछड़ा वर्ग की महिलाओं के लिए 08 सीटें आरक्षित रहेंगी।
यही चक्रानुक्रम महापौर पद के लिए भी लागू होगा, लेकिन इसके लिए आरक्षण की सूची प्रदेश स्तर पर बनेगी। उसमें संभावना जताई जा रही है कि महापौर की तीन सीटें आरक्षित रहेंगी। यदि चक्रानुक्रम के अनुसार आरक्षण किया गया तो झांसी की सीट में बदलाव हो सकता है।
यह पेच बिगाड़ सकता है आरक्षण
जनप्रतिनिधियों के आरक्षण में व्यवस्था है कि जिला पंचायत अध्यक्ष, विधायक अथवा महापौर में से कोई एक सीट आरक्षित होनी चाहिए। इस हिसाब से देखें तो झांसी सदर विधायक की सीट और जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट सामान्य है। इस हिसाब से महापौर की सीट आरक्षण की श्रेणी मेें आती है। यदि इस नियम का पालन किया गया तो महापौर पद आरक्षित रहेगा। लेकिन, यदि इसमें शिथिलता बरती गई तो सीट में बदलाव हो सकता है।
शुरू के आठ वार्ड हो सकते हैं आरक्षित
वार्डों के परिसीमन में अनुसूचित जातियों की अधिकता वाले वार्डों को घटते क्रम में रखा गया है। इस हिसाब से यदि अनुसूचित जाति की जनसंख्या को आधार माना जाए तो शुरू के आठ वार्ड अनुसूचित जाति के खाते में जा सकते हैं।
मई में आचार संहिता की उम्मीद
निर्वाचन आयोग जिस तेजी से चुनाव की तैयारियां कर रहा है, उससे माना जा रहा है कि मई के अंतिम सप्ताह में चुनाव आचार संहिता लग जाएगी।
- अरुण प्रकाश
नगर आयुक्त