झांसी। शनिवार को चार्टर्ड अकाउंटेंट दिनेश सेठी के घर का ताला तोड़कर आयकर विभाग की टीम अंदर दाखिल हो गई। टीम ने दस्तावेजों की पड़ताल की। कई अहम दस्तावेज टीम के हाथ लगे हैं।
आयकर विभाग के सौ अधिकारियों की टीमों ने बुधवार की सुबह झांसी के बिल्डरों के यहां छापा मारा था। विभाग की एक टीम जानकीपुरम निवासी चार्टर्ड अकाउंटेंट दिनेश सेठी के घर भी पहुंची थी। उस वक्त उनके घर पर ताला पड़ा था। बताया गया था कि सीए मॉर्निंग वॉक के लिए निकले हैं, जबकि उनके परिवार के सदस्य झांसी से बाहर हैं। इसके बाद से चार्टर्ड अकाउंटेंट लौटकर नहीं आए। आयकर विभाग के लोगों ने कई बार उनसे संपर्क किया, लेकिन वह नहीं आए। इस दरम्यान पता चला कि वह शिवपुरी में हैं और बाद में जानकारी हुई कि वे लखनऊ में हैं। शुक्रवार को आयकर विभाग को सूचना मिली कि वह गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में स्वास्थ्य खराब होने की वजह से भर्ती हैं। जबकि, इस दौरान इनकम टैक्स विभाग की चार सदस्यीय टीम उनके घर के बाहर बरामदे में लगातार डेरा जमाए रही। शनिवार को विभागीय मुख्यालय की अनुमति मिलने के बाद सीए के घर का ताला तोड़ दिया गया। इस पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई गई। इसके अलावा क्षेत्रीय पार्षद विकास खत्री व एसबीआई के दो कर्मचारियों की मौजूदगी में सीए के घर के ताले तोड़े गए। आईटी टीम ने अंदर जाकर पड़ताल की।
अहम कड़ी माना जा रहा है सीए को
झांसी। चार्टर्ड अकाउंटेंट दिनेश सेठी को बिल्डरों के बीच की अहम कड़ी माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार सीए के पास कुछ बिल्डरों के लेन-देन से जुड़े अहम दस्तावेज मौजूद हैं। यही वजह है कि आयकर विभाग की टीम तीन दिन तक लगातार सीए के लौटने का इंतजार करती रही। न आने पर चौथे दिन शनिवार को ताला तोड़कर भीतर दाखिल हो गई।
चार करोड़ के गहने, एक करोड़ की नकदी और मिली
कर चोरी की आशंका में घनाराम ग्रुप के यहां शुरू हुई आयकर विभाग की कार्रवाई चौथे दिन भी जारी रही। घनाराम ग्रुप और इससे जुड़े बिल्डरों के यहां से एक करोड़ की नकदी और मिली है। वहीं लॉकरों से करीब चार करोड़ के गहने मिले हैं। ग्रुप चार साल से फर्जी बिलिंग के जरिये कम मुनाफा दिखा रहा था। नकदी के जरिये होने वाली कमाई का रिकार्ड भी नहीं मिला है। जमीन और फ्लैटों की बिक्री में स्टांप चोरी का भी मामला सामने आया है। सूत्रों के अनुसार ग्रुप लंबे समय से फर्जी बिलिंग में लगा है। कागजों में दूसरे ठेकेदारों द्वारा काम कराना और भुगतान दिखाया है। इसमें कर चोरी की जांच की जा रही है। चार साल तक के फर्जी बिलिंग के सुबूत मिले हैं। अब इससे पहले सालों के भी दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं।