अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। सिकमी किरायेदारों के लिए नामांतरण शुल्क में बढ़ोतरी करने एवं पैसा जमा न करने पर दुकान सील करने की जारी नोटिस ने तूल पकड़ लिया है। बड़ी संख्या में नाराज व्यापारी बुधवार को महापौर बिहारीलाल आर्य का घेराव करने नगर निगम पहुंच गए। यहां महापौर को न देख व्यापारी बिफर पड़े। महापौर कक्ष में वह धरने पर बैठ गए। इस वजह से काफी देर तक वहां हंगामा होता रहा। कुछ देर बाद महापौर के आने पर व्यापारियों ने ज्ञापन सौंपते हुए कार्रवाई रोकने की मांग की। महापौर ने भी उनकी सुनवाई करने का भरोसा दिलाया है।
नगर निगम इन दिनों सिकमी किरायेदारों को नियमित करने की कार्रवाई में जुटा है। सिकमी किरायेदारों के लिए सात हजार रुपये प्रति वर्ग फीट की दर तय हुई है। इस पर व्यापारी नाराज हैं। उप्र व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष संजय पटवारी की अगुवाई में बड़ी संख्या में व्यापारी बुधवार को प्रदर्शन करने नगर निगम पहुंच गए। प्रदेश अध्यक्ष के मुताबिक महापौर से उन लोगों ने समय लिया था लेकिन, महापौर नहीं पहुंचे। व्यापारी करीब दो घंटे इंतजार करते रहे। दोपहर करीब 2:30 बजे तक जब महापौर नहीं पहुंचे तब व्यापारियों का सब्र छलक उठा। व्यापारियों ने हंगामा करना शुरू कर दिया।
उनकी अनुपस्थिति में महापौर की कुर्सी पर ज्ञापन चस्पा करके धरने पर बैठ गए। कुछ देर बाद महापौर पहुंच गए। व्यापारियों ने ज्ञापन सौंपते हुए नामांतरण शुल्क कम करने की मांग की। महापौर ने सुनवाई का भरोसा दिलाया। इस दौरान इलाइट चौराहे व्यापार मंडल अध्यक्ष भारत भूषण गुप्ता, महामंत्री गुड्डन अग्रवाल, पीयूष आनंद, आशीष बिरथरे, बृजेंद्र अग्रवाल, किशन पंजाबी आदि व्यापारी मौजूद रहे।
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सिकमी किरायेदारों के नामांतरण शुल्क पर विरोध
नगर निगम के स्वामित्व में कुल करीब 1200 दुकानें हैं। इनमें से 800 से अधिक दुकानें सिकमी के पास हैं। सिकमी दुकानदार मोटा किराया चुकाते हैं लेकिन, यह पैसा नगर निगम को न मिलकर दुकान का मूल आवंटी वसूलता है। ऐसे में निगम प्रशासन इन सिकमी किरायेदारों के नाम ही दुकानों को आवंटित करना चाहता है लेकिन, इसके लिए सात हजार रुपये प्रतिवर्ग फीट की दर से नामांतरण शुल्क तय किया है। इसे काफी अधिक बताते हुए सिकमी किरायेदार विरोध कर रहे हैं।
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भाजपा पार्षद भी जता चुके विरोध
झांसी। सिकमी दुकानदारों के नामांतरण शुल्क पर भाजपा पार्षद भी नाराजगी जता चुके हैं। मंगलवार को पूर्व उपसभापति सुनील नैनवानी की अगुवाई में पार्षदों ने महापौर को ज्ञापन सौंपते हुए इस पर रोक लगाने की मांग की थी।