एरच। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकों की कमी से मरीज परेशान हैं। इलाज न मिलने के कारण उन्हें 20 किलोमीटर दूर इलाज के लिए जाना पड़ता है। कई बीमार निजी अस्पतालों पर उपचार कराने को विवश हैं।
केंद्र पर पिछले 15 साल से वार्ड बॉय तैनात नहीं है। स्वीपर ही मरीजों की मरहम पट्टी कर रहा है। यहां पदस्थ चिकित्सक दो साल के प्रशिक्षण पर गए हैं। उनके स्थान पर अभी तक कोई नया चिकित्सक नियुक्त नहीं किया गया है। फार्मासिस्ट बिना चिकित्सक और जांच के ही दवा वितरित करते हैं। कार्यरत लैब टेक्नीशियन के नियमित न आने से जांच की सुविधा भी मरीजों को नहीं मिल पाती है। दवा के अभाव में मरीजों को हमेशा बाहर से दवा लाने को मजबूर होना पड़ता है। कर्मचारी समय पर नहीं आते, जिससे मरीज घंटों इंतजार कर निराश होकर लौट जाते हैं। मरीजों ने आरोप लगाया कि केंद्र पर उपचार केवल मरहम पट्टी तक सीमित रहता है।
स्वास्थ्य केंद्र की हालत सुधारने के लिए कई बार अधिकारियों को अवगत कराया गया है। लेकिन अधिकारियों द्वारा केवल आश्वासन दिया जाता है। धरातल पर कोई अमल नहीं होता, जिससे क्षेत्र के मरीजों में नाराजगी बनी हुई है। एरच स्वास्थ्य केंद्र से दो दर्जन गांवों के मरीज जुड़े हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्य केंद्र की हालत बदतर बनी हुई है। संवाद
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की आवश्यकता
चंद्रपाल पाठक, रविंद्र केवट, जगदीश
क्षेत्र के लोग एरच स्वास्थ्य केंद्र को उच्चीकृत कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनाने की मांग कर रहे हैं। यह प्रयास पिछले दस साल से लगातार किया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों के यहां क्षेत्रीय लोगों की यह मांग फाइलों में बंद पड़ी है। एरच सहित दो दर्जन गांवों के मरीजों को 20 किलोमीटर दूर मोठ, गुरसरांय, बामौर जाना पड़ता है।
ये है मानक
पद मानक तैनाती रिक्त पद
डॉक्टर 2 0 0
वार्डबॉय 1 0 1
लैबटेक्नीशियन-1 1 1
एएनएम 5- 3 2
एरच स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सक का पद रिक्त है और जल्द ही मरीजों के उपचार के लिए चिकित्सक की व्यवस्था की जाएगी।
शिशर पुरी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी झांसी