सूत्रों के अनुसार महाविद्यालय बिजौली में 16, गणेशपुरा में 34, माधौगढ़ में तीन, कालपी में 35, कोंच में 14, कटेरा में पांच व जखौरा में मात्र 170 सीटों पर दाखिले हुए हैं।
उच्च शिक्षा विभाग और बुंदेलखंड विवि के जिम्मेदारों की ढिलाई से शासन की मंशा तार-तार हो रही है। शासन ने आठ महाविद्यालय बनाने में 80 करोड़ रुपये खर्च किए, हर माह लाखों रुपये वेतन भी दे रहा है, लेकिन इनमें दाखिले अंगुलियों पर गिनने लायक हुए हैं। प्रवेश में रुचि दिखाने के बजाय कुछ महाविद्यालयों ने 23 सितंबर से दो अक्तूबर तक दशहरा की छुट्टी भी कर दी है।
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ग्रामीण इलाकों के छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए दूरस्थ महाविद्यालयों में जाना पड़ता है। इसे देखते हुए शासन ने बुंदेलखंड के जखौरा (ललितपुर), पाही (चित्रकूट), गनेशपुरा (बबीना), राठ (हमीरपुर), माधौगढ़ (जालौन), कटेरा (मऊरानीपुर), कालपी (जालौन) और बिजौली में करीब 10-10 करोड़ रुपये की लागत से महाविद्यालयों की बिल्डिंग बनवाया। इनके संचालन के लिए प्राचार्य व शिक्षकों की तैनाती भी कर दी। लेकिन, इन महाविद्यालयों में दाखिले हैरान करने वाले हैं।
सूत्रों के अनुसार महाविद्यालय बिजौली में 16, गणेशपुरा में 34, माधौगढ़ में तीन, कालपी में 35, कोंच में 14, कटेरा में पांच व जखौरा में मात्र 170 सीटों पर दाखिले हुए हैं। क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी सुनील बाबू का कहना है कि महाविद्यालयों में कम प्रवेश को लेकर कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। परीक्षा नियंत्रक राजबहादुर का कहना है कि प्रवेश प्रक्रिया चल रही है, अभी दाखिले बढ़ने की उम्मीद है।
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पहले आओ, पहले पाओ के तहत दाखिले शुरू
बुंदेलखंड विवि ने संबद्ध कॉलेजों में पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी है। दावा किया जा रहा है कि दो दिन के अंदर करीब 20 हजार दाखिले हो चुके हैं। इसके तहत विद्यार्थी को समर्थ पोर्टल पर पंजीकरण करना पड़ता है। कॉलेज का चयन करने के साथ ही प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है। परीक्षा नियंत्रक राजबहादुर ने बताया कि पहले आओ पहले पाओ योजना के तहत प्रवेश लेने वालों का आंकड़ा काफी बढ़ गया है।