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Jhansi News: बंद नहीं हुआ कमीशन का खेल, सरकारी पर्चे पर लिख रहे बाहर की दवा

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झांसी। जिला अस्पताल में डॉक्टरों और दवा कंपनियों के बीच कमीशन का खेल अब तक बंद नहीं हुआ है। यहां पर डॉक्टर धड़ल्ले से मरीजों को बाहर की दवाएं लिख रहे हैं। हाल ये है कि सरकारी पर्चे तक पर ब्रांडेड दवा लिखी जा रही है। दूसरी तरफ, अस्पताल से दवा न मिलने पर जब मरीज जन औषधि केंद्र से दवा खरीदते हैं, तो चिकित्सक उसे बेअसर बताते हुए वापस करा दे रहे हैं।
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केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत जगह-जगह जन औषधी केंद्र खोले गए हैं। ये केंद्र सरकारी अस्पतालों में भी खुले हैं। जहां 20 से लेकर 70 फीसदी रियायती दरों पर दवाएं मिलती हैं। मगर डॉक्टरों और दवा कंपनियों के बीच कमीशन के खेल में मरीजों को रोजाना सैकड़ों रुपये की दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं। सोमवार को अमर उजाला ने अस्पताल में कई मरीजों से बात की। रोगियों ने बताया कि डॉक्टर अगर पांच दवा लिखते हैं तो बामुश्किल एक या दो ही मिल पाती हैं। दूसरी तरफ, जब मरीज दवाएं खरीदने के लिए जन औषधि केंद्र पर जाते हैं तो वहां की दवाएं डॉक्टर ये कहकर वापस करा देते हैं कि ये बेअसर हैं। सोमवार को भी कई रोगियों की दवाएं डॉक्टरों ने वापस कराईं।

झांसी में बंद हो चुके छह केंद्र
झांसी में 14 जन औषधि केंद्र खुले थे। मगर डॉक्टरों ने जेनेरिक दवाएं लिखी नहीं। इस वजह से केंद्रों के सामने दुकान का किराया और स्टाफ का खर्चा निकालना तक मुश्किल हो गया। धीरे-धीरे छह केंद्र बंद हो चुके हैं। जो संचालित हैं, उनमें भी कई बंद होने की स्थिति में हैं।
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पेट दर्द की समस्या बनी हुई है। डॉक्टर ने दो दवा बाहर की लिख दी हैं। अगर जन औषधि केंद्र से दवा लेकर जाओ तो वापस करा देते हैं। - प्रकाश चंद योगी, लक्ष्मी गेट।

डॉक्टर ने पांच दवाएं लिखी हैं। इसमें से तीन तो जिला अस्पताल से ही मिल गईं, बाकी बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं। इसमें काफी पैसा खर्च हो जाएगा। - कुसुम, नगरा।
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